सालों पहले खत्म हो चुकी थी नैक ग्रेडिंग, फिर भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी करती रही झूठा दावा; जांच में बड़ा खुलासा

अल-फलाह यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर वर्षों तक नैक (NAAC) की ग्रेडिंग का झूठा दावा किया जाता रहा, जबकि इसकी वैधता काफी पहले ही समाप्त हो चुकी थी। क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में यह बड़ा खुलासा हुआ है। मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय ने चुपचाप अपनी वेबसाइट से यह दावा हटा दिया।

 दो संस्थानों की ग्रेडिंग की अवधि खत्म

एफआईआर के अनुसार—

अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी को नैक की साइकिल-2 ग्रेड A ग्रेडिंग 27 मार्च 2013 को मिली थी, जिसकी अवधि 5 साल की थी।

अल-फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग को 27 अप्रैल 2011 को साइकिल-1 ग्रेड A दिया गया था, यह भी 5 साल के लिए मान्य था।

नियमों के अनुसार, इन संस्थानों को ग्रेडिंग अवधि समाप्त होने से पहले आगे की श्रेणी के लिए आवेदन करना चाहिए था।
लेकिन न तो पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया गया, न ही ग्रेडिंग बढ़ाने की कोशिश।

 वेबसाइट पर जारी रहा झूठा दावा

अवधि खत्म होने के बावजूद विश्वविद्यालय NAAC ग्रेड A का दावा अपनी वेबसाइट पर दिखाता रहा।
नैक को जब इसकी जानकारी मिली तो उसने 12 नवंबर को विश्वविद्यालय को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
नोटिस मिलते ही विश्वविद्यालय ने वेबसाइट से दावा हटा दिया, लेकिन नैक पहले ही स्क्रीनशॉट ले चुका था।

कोई जवाब न मिलने पर FIR

नैक की ओर से 13 नवंबर को स्क्रीनशॉट समेत शिकायत क्राइम ब्रांच को भेजी गई।
इसके आधार पर ठगी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया।

UGC ग्रांट का भी फर्जी दावा

अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर एक और गंभीर आरोप सामने आया है।
UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) ने शिकायत दी है कि—

12 नवंबर को विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर भूपिंदर कौर आनंद ने बयान दिया था कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी को UGC से अनुदान मिलता है। UGC के अनुसार यह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है। यही नहीं, UGC ने बयान की कॉपी भी सबूत के तौर पर क्राइम ब्रांच को दी। इसके बाद इस मामले में दूसरी एफआईआर दर्ज की गई