नेपाल के PM और Governor पढ़े BHU में… फिर भी बंद हुआ नेपाल अध्ययन केंद्र!

Banaras Hindu University (BHU) का नेपाल अध्ययन केंद्र, जो ट्रांस-हिमालय क्षेत्र पर रिसर्च करने वाला देश का एकमात्र केंद्र था, अपनी 50th anniversary पूरी करने से पहले ही बंद हो गया। 2025 में इसकी स्थापना के 50 साल पूरे होने थे, लेकिन 2024 में ही इसे political science department में समायोजित कर दिया गया।

अब यहाँ न कोई प्रोफेसर है, न छात्र, न शोधार्थी और न ही कोई स्टाफ। इसलिए इसे व्यावहारिक तौर पर बंद माना जा रहा है।

नेपाल के नेताओं की BHU से शिक्षा – फिर भी उपेक्षा!

नेपाल के कई बड़े नेताओं ने BHU से पढ़ाई की है।

Chiranjivi Nepal, नेपाल राष्ट्र बैंक के गवर्नर, BHU से PhD कर चुके हैं।

Sushila Karki, नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री, ने BHU से MA किया।

BP Koirala, नेपाल के 22वें प्रधानमंत्री (1959–60), ने BHU से graduate degree (1934) ली।

नेपाल के कई सांसद भी BHU से शिक्षा प्राप्त कर राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभा चुके हैं। इसलिए यह केंद्र नेपाल अध्ययन में विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण बन सकता था।

विदेशी छात्रों में नेपाल का दबदबा

BHU के foreign students में से 60% से अधिक छात्र नेपाल से हैं। हर साल 600 से अधिक विदेशी छात्र प्रवेश लेते हैं, जिनमें 378 नेपाल से हैं। 1976 में UGC Area Study Program के तहत नेपाल अध्ययन केंद्र की शुरुआत की गई थी। साथ ही जापानी भाषा का one-year PG diploma course भी चलाया गया था, जो अब बंद हो चुका है।

शोध और बजट भी बंद – क्या भविष्य अंधकारमय?

राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर के अनुसार, नेपाल अध्ययन केंद्र के लिए नेपाल सरकार भी funding देती थी। लेकिन अब भवन तक नहीं बचा है। रिसर्च काम ठप हैं। पूर्व समन्वयक Prof NP Singh ने कहा कि पिछले कुलपति के कार्यकाल में ही इसे बंद कर दिया गया था।

शोध क्यों जरूरी?

प्रोफेसरों का मानना है कि नेपाल पर गंभीर अध्ययन होने चाहिए, जिससे क्षेत्र में होने वाली अस्थिरता जैसी समस्याओं का समाधान निकाला जा सके। केंद्र के बंद होने से cross-border research, cultural studies, economic exchange जैसे क्षेत्रों में नुकसान हो रहा है।

नेपाल की अशांति से बनारस का कारोबार प्रभावित

नेपाल में चल रही हिंसा और प्रदर्शन की वजह से बनारस से नेपाल जाने वाले फूलों का कारोबार बंद हो गया है।

रोजाना 10 से 15 हजार marigold garlands नेपाल भेजे जाते थे।

इससे स्थानीय व्यापारियों का काम प्रभावित हो रहा है।