स्पोर्ट्स सिटी में क्यों फंसे 30,000 परिवार? जानिए होमबायर्स को कब्जा न मिलने की असली वजह

नोएडा के स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट्स में बने 30,000 से ज्यादा अपार्टमेंट्स के होमबायर्स को आज भी अपने घर की रजिस्ट्री और कब्जा मिलने का इंतजार है। सेक्टर 78, 79 और 150 में स्थित इन परियोजनाओं में काम कर रही रियल एस्टेट कंपनियों और नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) के बीच ब्याज दरों और लीज़ रेंट को लेकर विवाद चल रहा है, जिसने पूरे प्रोजेक्ट को रोक दिया है।

क्या है असली विवाद?

नोएडा प्राधिकरण ने रियल एस्टेट कंपनियों को लीज़ प्रीमियम (Lease Premium) और लीज़ रेंट (Lease Rent) के बकाया भुगतान को लेकर भारी-भरकम डिमांड नोटिस जारी किए हैं। लेकिन डेवलपर्स का दावा है कि इनकी गणना में MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) के बाद भी गड़बड़ी है।

क्रेडाई वेस्ट यूपी चैप्टर के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने बताया कि अगर एमसीएलआर आधारित पुनर्गणना लागू की जाती है तो बकाया कम हो सकता है, जिससे डेवलपर्स भुगतान कर पाएंगे और प्रोजेक्ट्स को दोबारा ट्रैक पर लाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का क्या है आदेश?

24 जुलाई, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नोएडा प्राधिकरण घर खरीदारों को कब्जा देने में बाधा न डाले और बाकी कार्रवाई अंतिम आदेश के अधीन रहेगी। कोर्ट ने कहा कि नोएडा प्राधिकरण “आगे बढ़ने के लिए स्वतंत्र” है।

तो फिर रजिस्ट्री क्यों नहीं?

खरीदारों का सवाल वाजिब है—अगर डिमांड नोटिस भेजे जा सकते हैं, तो रजिस्ट्री की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती? याचिकाकर्ताओं और खरीदारों ने इसे Selective Action करार दिया है।

CAG की आपत्तियाँ और 30,000 करोड़ का नुकसान?
2020 में CAG रिपोर्ट में भूमि आवंटन और खेल सुविधाओं के अभाव पर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि गलत प्रक्रिया के चलते सरकार को ₹30,000 करोड़ का नुकसान हुआ। इस कारण, Noida Authority ने सभी अनुमोदन रोक दिए।

हालांकि रियल एस्टेट कंपनियों का दावा है कि Public Accounts Committee ने अब सभी आपत्तियों को क्लियर कर दिया है और उत्तर प्रदेश सरकार ने रुक चुके प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है।

डेवलपर्स का कहना क्या है?
स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं में:

0.5% भूमि वाणिज्यिक है

29.5% भूमि ग्रुप हाउसिंग के लिए है

70% भूमि खेल व मनोरंजन के लिए है

फिर भी Commercial Project Rates पर टाइम एक्सटेंशन फीस लगाई जा रही है, जो गलत है। इसके साथ ही डेवलपर्स ने कोविड महामारी और 2021 के निर्माण प्रतिबंधों को देखते हुए Time Extension Fee में छूट की मांग की है।

स्पोर्ट्स सिटी विवाद ने न सिर्फ रियल एस्टेट कंपनियों बल्कि हजारों होमबायर्स को मुश्किल में डाल दिया है। कोर्ट के आदेश और सरकार के दिशानिर्देशों के बावजूद अगर रजिस्ट्री और कब्जा नहीं मिल रहा, तो सवाल उठता है – क्या नोएडा प्राधिकरण जानबूझकर देरी कर रहा है?