Hydro Power Shutdown: Sudden power crisis in Uttarakhand, power cut till Dehradun!
उत्तराखंड में power crisis ने अचानक गंभीर रूप ले लिया है। लगातार बारिश के चलते नदियों में सिल्ट (गाद) की मात्रा तेजी से बढ़ गई, जिससे राज्य के hydro power projects को बड़ा नुकसान हुआ। हालात ऐसे बने कि एक साथ 9 पावर हाउसों को बंद करना पड़ा, जिससे सीधे 646 मेगावाट बिजली उत्पादन रुक गया।
इस वजह से राज्यभर में emergency power cut करनी पड़ी। जबकि देहरादून और कुछ बड़े शहरों को छोड़ दें तो ज्यादातर ग्रामीण इलाके, कस्बे और औद्योगिक क्षेत्र घंटों अंधेरे में डूबे रहे।
कौन-कौन से पावर हाउस हुए बंद?
बारिश के बाद नदी जल में सिल्ट की बढ़ोतरी के कारण सबसे पहले उत्तरकाशी में स्थित मनेरी भाली-I और II पावर प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा। इसके बाद पछवादून के सभी प्रमुख पावर हाउसों—छिबरो, खोदरी, कुल्हाल, व्यासी, ढकरानी और ढालीपुर—को भी एक के बाद एक बंद करना पड़ा।
हालात और बिगड़े जब उधम सिंह नगर (US Nagar) स्थित खटीमा पावर हाउस से भी बिजली उत्पादन रोक दिया गया।
पूरा Power Supply System बैठा, Grid से भी नहीं मिली राहत
एक साथ इतने power plants shutdown होने से पूरा सप्लाई सिस्टम चरमरा गया। UPCL (Uttarakhand Power Corporation Limited) ने स्थिति को संभालने के लिए नेशनल ग्रिड से overdraw करने की कोशिश की, लेकिन वो प्रयास भी सफल नहीं हो सका।
ग्रिड फेल न हो, इसके लिए शाम 7 बजे से statewide emergency load shedding शुरू कर दी गई।
कहां-कहां हुई बिजली कटौती?
हालात इतने गंभीर हो गए कि देहरादून नगर निगम क्षेत्र को छोड़कर बाकी कई हिस्सों में बिजली गुल करनी पड़ी। जिन क्षेत्रों में कटौती की गई उनमें शामिल हैं:
डोईवाला
सेलाकुई
सहसपुर
हबर्टपुर
ऋषिकेश
श्यामपुर
रायवाला
इसके अलावा हरिद्वार, यूएस नगर और नैनीताल के ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में भी देर रात तक power cut जारी रही। Industries in Uttarakhand को भी इस संकट का सामना करना पड़ा।
बारिश की मार से बिजली उत्पादन पर संकट
इस Uttarakhand electricity crisis ने एक बार फिर दिखा दिया कि प्राकृतिक आपदाएं कैसे इंफ्रास्ट्रक्चर को अचानक प्रभावित कर सकती हैं। लगातार बारिश और उसके कारण नदियों में सिल्ट जमा होना, hydro power plants के लिए खतरे की घंटी बन गया है। आने वाले दिनों में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए शासन और ऊर्जा विभाग को विशेष रणनीति बनानी होगी।