AC नहीं, देसी कूलर! अफगान टैक्सी ड्राइवरों का गजब जुगाड़ जो ठंडी राहत देता है”

जब दुनिया महंगे एसी सिस्टम और हाईटेक कारों की ओर बढ़ रही है, तब अफगानिस्तान के टैक्सी ड्राइवरों ने भीषण गर्मी में राहत पाने के लिए एक ऐसा देसी जुगाड़ खोज निकाला है, जो न सिर्फ किफायती है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है।

कंधार की सड़कों पर दौड़ती नीली टैक्सियों में अब दिखते हैं ऐसे कस्टम मेड कूलर, जो गर्म हवा को मात देकर ठंडी राहत देते हैं। इस स्मार्ट इनोवेशन ने दिखा दिया है कि ज़रूरत हो तो Low-Cost Cooling Solution भी कारगर साबित हो सकता है।

 कैसे काम करता है यह जुगाड़ू कूलिंग सिस्टम?

इस देसी कूलिंग सिस्टम में टैक्सी की छत पर एक विशेष air-conditioning unit लगाई जाती है। इसकी exhaust pipe विंडो के ज़रिए कार के अंदर हवा पहुंचाती है। यह सिस्टम टैक्सी की बैटरी से चलता है और इसे समय-समय पर पानी से भरा जाता है, जैसे किसी कूलर को किया जाता है।

गुल मोहम्मद, जो इस विचार के जनक हैं, कहते हैं:

“इन कारों के असली AC सिस्टम या तो नहीं हैं या बहुत महंगे पड़ते हैं। हमने 3,000 अफगानी ($43) में ये कूलर बनवाया और अब गर्मी से निजात मिल रही है।”

 सौर ऊर्जा से भी चलता है ये देसी AC!

कुछ टैक्सी ड्राइवरों ने अपनी गाड़ियों की छत पर solar panels भी लगवा दिए हैं, जिससे यह कूलिंग सिस्टम पूरी तरह eco-friendly बन गया है। यह नवाचार ना सिर्फ़ गर्मी से बचा रहा है, बल्कि ईंधन और बिजली के खर्च में भी बचत कर रहा है।

 यात्रियों और तकनीशियन का क्या कहना है?

21 वर्षीय तकनीशियन मुर्तज़ा के मुताबिक़,

“अब हर दूसरा टैक्सी ड्राइवर हमारे पास ये कूलर लगवाने आ रहा है। पुराने वाहनों में ये बेहतरीन काम करता है।”

वहीं एक यात्री ने बताया:

“जब कूलर नहीं होता तो अंदर बैठना मुश्किल हो जाता है। अब ये टैक्सी ड्राइवर हमें राहत पहुंचा रहे हैं।”

 जलवायु परिवर्तन के बीच जुगाड़ की ज़रूरत

अफगानिस्तान न केवल दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक है, बल्कि climate change के प्रभावों के प्रति सबसे vulnerable भी। कंधार जैसे इलाकों में 40°C से ऊपर का तापमान आम हो चला है, और सूखा, गर्म हवाएं तथा संसाधनों की कमी लोगों को मुश्किल में डाल रही है।

ऐसे में यह कूलिंग सिस्टम केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि survival strategy भी है।