जयशंकर का जवाब: अमेरिका नहीं, सेना ने कराया पाकिस्तान से सीजफायर
भारत और पाकिस्तान के बीच 10 मई को हुए सीजफायर पर जब एक विदेशी पत्रकार ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से पूछा — “क्या आप अमेरिका को थैंक्स बोलेंगे?” — तो उन्होंने सधा हुआ लेकिन करारा
जवाब देते हुए कहा:
“सीजफायर हमारी सेना की ताकत का नतीजा है, अमेरिका का इसमें कोई रोल नहीं।”
ऑपरेशन सिंदूर का असर: पाकिस्तान ने खुद मांगी शांति
विदेश मंत्री ने बताया कि:
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भारत की सेना ने पाकिस्तान के एयरबेस और डिफेंस सिस्टम पर सर्जिकल अटैक किए।
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इससे पाकिस्तान की सैन्य ताकत को गंभीर नुकसान हुआ।
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इसके बाद पाकिस्तानी DGMO ने खुद भारतीय DGMO को हॉटलाइन पर कॉल किया और सीजफायर की अपील की।
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जयशंकर ने साफ किया:
“जिसने दुश्मन को झुकाया, उसे धन्यवाद देना चाहिए — और वो है भारतीय सेना।”
🇺🇸 अमेरिका की भूमिका को किया खारिज
जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्होंने भारत-पाक सीजफायर में मध्यस्थता की, वहीं भारत ने इसे साफ तौर पर नकार दिया।
“सीजफायर दो देशों के मिलिट्री कमांडर्स के बीच सीधे संवाद से हुआ। कोई विदेशी मध्यस्थता नहीं हुई।”
भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका को केवल यह बताया गया था कि:
“Terrorism और Talks साथ नहीं चल सकते।”
‘न्यूक्लियर वॉर’ के सवाल पर जयशंकर का जवाब
एक और सवाल में जब पत्रकार ने पूछा कि क्या भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की आशंका थी, तो जयशंकर ने स्पष्ट कहा:
“हम इस सवाल से थक चुके हैं। हमने केवल आतंकी ठिकानों को टारगेट किया, आम नागरिकों पर हमला नहीं किया। जवाबी फायरिंग केवल तब की जब पाकिस्तान ने हम पर फायर किया।”
मुख्य बिंदु:
विषय |
विवरण |
सीजफायर का कारण |
भारतीय सेना की आक्रामक कार्रवाई |
अमेरिका की भूमिका |
भारत ने खारिज किया, सीधा संवाद DGMO स्तर पर हुआ |
जयशंकर का रुख |
सेना को धन्यवाद, अमेरिका को नहीं |
पाकिस्तानी पहल |
खुद संपर्क कर सीजफायर मांगा |
न्यूक्लियर वॉर पर जवाब |
केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, कोई उकसावे की कार्रवाई नहीं |