Reference Image- Pakistan shaken by India's strategy after attack on 9 terrorist camps: Revelation in parliamentary committee
भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर के तहत की गई एयरस्ट्राइक और पाकिस्तान से बातचीत को लेकर जारी सियासी बहस के बीच केंद्र सरकार ने संसदीय सलाहकार समिति को स्थिति स्पष्ट की है। बैठक में बताया गया कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह की कोई पूर्व सूचना या बातचीत नहीं हुई, केवल हमले के बाद DGMO स्तर पर संपर्क किया गया।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को दी गई जानकारी
सरकारी सूत्रों के अनुसार, PIB की प्रेस विज्ञप्ति जारी होने के बाद भारत के DGMO ने पाकिस्तानी DGMO से बात की। बैठक में बताया गया कि:
“पहले भारत ने पीओके में मौजूद तीन प्रमुख आतंकी शिविरों पर हमला किया, फिर DGMO स्तर पर जानकारी साझा की गई।”
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कांग्रेस के आरोपों को “बेईमानी और तथ्यात्मक रूप से गलत” करार दिया।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन और पाकिस्तान की अलग-थलग स्थिति
भारत सरकार ने समिति को बताया कि यह अभियान पाकिस्तान के खिलाफ नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ था, इसलिए विश्व समुदाय ने भारत का समर्थन किया। सिर्फ तीन देशों – तुर्की, अजरबैजान और चीन ने भारत का साथ नहीं दिया।
सरकार ने यह भी कहा कि:
“आतंकी शिविरों पर हमले ने पाकिस्तान की सच्चाई उजागर कर दी है और उसकी सेना के मनोबल को भी चोट पहुंचाई है।”
सिंधु जल समझौते पर क्या बोले सांसद और सरकार?
बैठक में सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को रद्द करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। कुछ सांसदों ने पूछा कि क्या इसे प्रतीकात्मक तौर पर निलंबित किया गया है या सरकार वाकई इसे खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है?
सरकार की ओर से जवाब मिला:
“फिलहाल यह संधि निलंबित है। आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इसकी जानकारी सांसदों को समय पर दी जाएगी।”
🇺🇸 अमेरिका की भूमिका पर दो टूक
कई सांसदों ने अमेरिकी हस्तक्षेप और ट्रंप के पुराने दावों को लेकर सवाल उठाए। इस पर विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया:
“अमेरिका और अन्य देशों को साफ बता दिया गया है कि Terrorism और Talks एक साथ नहीं हो सकते। कुछ देश भारत पर पाकिस्तान से बातचीत के लिए दबाव बना रहे थे, लेकिन भारत ने अपनी नीति नहीं बदली।”
राष्ट्रीय एकता की अपील
एस. जयशंकर ने सांसदों से कहा कि:
“दुनिया के सामने भारत को एकजुट और निर्णायक रूप में प्रस्तुत करना बेहद जरूरी है। सभी प्रतिनिधिमंडलों को वैश्विक मंचों पर भारत की कूटनीतिक रणनीति का समर्थन करना चाहिए।”