Bangladesh Cancels $21 Million Defence Deal with India: चीन की बाहों में क्यों झुक गया ढाका?

नई दिल्ली-दक्षिण एशिया में भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक झटका सामने आया है। बांग्लादेश सरकार ने भारत के साथ हुआ $21 मिलियन (लगभग ₹180 करोड़) का रक्षा सौदा अचानक रद्द कर दिया है। यह टग बोट डील भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम Garden Reach Shipbuilders and Engineers (GRSE) के साथ हुई थी, और भारत की तरफ से बांग्लादेश को दी गई $500 मिलियन की डिफेंस क्रेडिट लाइन के तहत पहला बड़ा प्रोजेक्ट था।

बांग्लादेश का अचानक यू-टर्न क्यों?

पिछले साल जुलाई में हुए इस सौदे के तहत 800 टन की एक आधुनिक महासागरीय टग बोट बनाई जानी थी। लेकिन शेख हसीना सरकार के जाने और नई अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद हालात बदल गए। रक्षा और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार भारत की बजाय चीन की ओर झुकाव दिखा रही है।

इंडिया-बांग्लादेश डिफेंस टाई-अप को झटका

GRSE की इस डील को भारत-बांग्लादेश के बीच military-industrial cooperation की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा था। लेकिन बांग्लादेश के यू-टर्न से भारत की डिफेंस डिप्लोमेसी पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

क्या चीन के दबाव में है बांग्लादेश?

भारत पहले ही बांग्लादेश की चीनी पनडुब्बी खरीद और अब लालमोनिरहाट एयरबेस पर चीन की मौजूदगी की खबरों को लेकर चिंतित है। यह हवाई अड्डा भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद करीब है, जिससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा को सीधा खतरा माना जा रहा है।

व्यापारिक संबंधों में भी तल्खी

सिर्फ रक्षा नहीं, बल्कि भारत-बांग्लादेश के व्यापारिक संबंधों में भी तनाव बढ़ा है। अप्रैल 2025 में बांग्लादेश ने भारतीय चावल, तंबाकू, धागे, पाउडर दूध और मछली जैसे उत्पादों पर प्रतिबंध लगाए। इसके जवाब में भारत ने बांग्लादेश से 770 मिलियन डॉलर के आयात पर रोक लगा दी और खासकर रेडीमेड गारमेंट्स को केवल दो बंदरगाहों तक सीमित कर दिया।

क्या बांग्लादेश चीन के साथ सैन्य गठबंधन करेगा?

बांग्लादेश के एक पूर्व जनरल फजलुर रहमान के बयान ने हालात को और गर्मा दिया। उन्होंने कहा कि यदि भारत पाकिस्तान पर हमला करता है तो बांग्लादेश को चीन के साथ मिलकर भारत के पूर्वोत्तर हिस्से को कब्जे में ले लेना चाहिए। हालांकि बांग्लादेश सरकार ने इस बयान से दूरी बना ली है, लेकिन भारत के लिए यह बयान “रियल पॉलिटिक वॉर्निंग” से कम नहीं है।

भारत के लिए क्या हैं रणनीतिक विकल्प?

  • डिप्लोमैटिक रीएंगेजमेंट: भारत को बांग्लादेश की नई सरकार के साथ तत्काल कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत है।

  • सार्क और BIMSTEC फ्रंट पर एक्टिव डिप्लोमेसी: ताकि चीन की पकड़ कमजोर की जा सके।

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