भारत ने भी वही किया जो अमेरिका ने ओसामा के साथ किया” – ऑपरेशन सिंदूर पर बोले उपराष्ट्रपति धनखड़

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भारत के हालिया ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा बयान देते हुए इसकी तुलना अमेरिका द्वारा ओसामा बिन लादेन को मारने वाले ऐतिहासिक ऑपरेशन से की है। उन्होंने कहा कि भारत अब आतंक के खिलाफ वैश्विक मानक तय कर रहा है और दुनिया यह देख रही है कि भारत आतंकवाद को सिर्फ सहन नहीं करेगा, बल्कि जड़ से खत्म करेगा।

 “जिसने पनाह दी, वहीं मारा” – उपराष्ट्रपति का इशारा साफ

धनखड़ ने भले ही ओसामा बिन लादेन का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संदर्भ स्पष्ट था। उन्होंने कहा:

“11 सितंबर 2001 के बाद, 2 मई 2011 को अमेरिका ने उस आतंकी को उसी देश में जाकर मारा जिसने उसे पनाह दी थी। भारत ने भी वही किया है।”

इस बयान से उन्होंने साफ संकेत दिया कि भारत ने पाकिस्तान और PoK में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की है, जैसा अमेरिका ने पाकिस्तान के एबटाबाद में किया था।

क्या था ऑपरेशन सिंदूर?

  • तारीख: 6-7 मई की रात, 01:05 से 01:30 बजे के बीच

  • लक्ष्य: पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी ठिकाने

  • निष्कर्ष: 100+ आतंकवादी मारे गए

  • प्रमुख आतंकी ढेर: अब्दुल रऊफ अजहर – जैश-ए-मोहम्मद का टॉप कमांडर, IC-814 हाइजैक और डैनियल पर्ल मर्डर केस से जुड़ा था

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, इस ऑपरेशन ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा की रीढ़ तोड़ दी।

सटीक वार, कोई सिविलियन हताहत नहीं

धनखड़ ने कहा कि इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि हमले बेहद सटीक थे और सिर्फ आतंकियों को निशाना बनाया गया, आम नागरिकों को कोई नुकसान नहीं हुआ। यह भारत की रणनीतिक क्षमता और मानवीय दृष्टिकोण का प्रमाण है।

पीएम मोदी का इशारा, दुनिया को मिला संदेश

उपराष्ट्रपति ने याद दिलाया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार की रैली से सख्त संदेश दिया था:

“ये सिर्फ भाषण नहीं था, अब दुनिया समझ चुकी है – भारत अब चुप नहीं रहेगा।”

शांति के साथ प्रतिशोध” – आतंक के खिलाफ भारत का नया दर्शन

धनखड़ ने कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जो कदम उठाए हैं, वे सिर्फ जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि आतंक की जड़ों पर हमला हैं। भारत ने साबित किया है कि शांति और सुरक्षा एक साथ चल सकती हैं

“नई दुनिया, नया भारत – अब वार के लिए तैयार है!”

Operation Sindoor न सिर्फ एक सैन्य सफलता है, बल्कि यह भारत की डिप्लोमैटिक और स्ट्रैटेजिक पावर का प्रदर्शन भी है।
जैसा अमेरिका ने किया था, वैसा ही अब भारत कर रहा है – और यह दुनिया को दिखा रहा है कि भारत अब सिर्फ सहने वाला नहीं, करारा जवाब देने वाला राष्ट्र है।