Ajay Kumar UPSC Chairman: पूर्व रक्षा सचिव को मिला नया दायित्व, जानिए क्यों हैं खास

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को मंगलवार को नया अध्यक्ष मिल गया। पूर्व रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार को देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था का New UPSC Chairman नियुक्त किया गया है।

उनकी नियुक्ति को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी और यह कार्यभार वे 65 वर्ष की आयु या 6 वर्षों तक निभा सकते हैं।

कौन हैं डॉ. अजय कुमार? | Ajay Kumar Biography

  1. 1985 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी

  2. 23 अगस्त 2019 से 31 अक्टूबर 2022 तक रक्षा सचिव

  3. CDS (Chief of Defence Staff) की रचना में अहम भूमिका

  4. Agniveer Scheme और Atmanirbhar Bharat Defence Initiatives में निर्णायक भागीदारी

  5. UPI, Aadhaar, myGov और GeM Portal जैसे Digital India Projects को बढ़ावा

  6. KELTRON के MD और प्रिंसिपल सेक्रेटरी के रूप में टेक्नोलॉजी सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव

  7. IIT Kanpur से B.Tech, University of Minnesota से PhD और MS

  8. Indian National Academy of Engineers के फेलो

  9. तीनों प्रमुख सरकारों (BJP, Congress, Left) के साथ सफल कार्य अनुभव

  10. Administrative और Strategic दोनों क्षेत्रों में गहरी समझ

UPSC के बारे में थोड़ा और

UPSC यानी Union Public Service Commission भारत की सर्वोच्च भर्ती संस्था है जो IAS, IPS, IFS जैसी सेवाओं के लिए Civil Services Examination आयोजित करती है।

  • इसमें एक Chairman और अधिकतम 10 सदस्य होते हैं।

  • वर्तमान में दो सदस्यीय पद खाली हैं।

  • UPSC चेयरमैन की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है

क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति? | Why Ajay Kumar’s Appointment Matters

  • रक्षा और तकनीक दोनों क्षेत्रों में डॉ. कुमार की गहरी पकड़ UPSC को नई दिशा दे सकती है।

  • वे Policy और Execution के संतुलन को बखूबी समझते हैं।

  • Digital India और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों में सक्रिय भागीदारी उनके विजन को दर्शाती है।

  • उनकी नियुक्ति से यह उम्मीद की जा रही है कि UPSC में तकनीकी सुधार, डिजिटाइजेशन और नीतिगत पारदर्शिता को और बल मिलेगा।

डॉ. अजय कुमार का UPSC चेयरमैन बनना सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम है जो आने वाले वर्षों में देश की सिविल सेवाओं की दिशा तय कर सकता है। उनका अनुभव, तकनीकी समझ और नीति निर्माण में विशेषज्ञता आने वाले अफसरों के चयन में नई सोच और पारदर्शिता लेकर आ सकती है।