Noida Labour Violence: Was the mob incited through social media? LLB student arrested
नोएडा में अप्रैल 2026 में हुई श्रमिक हिंसा के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के एक एलएलबी छात्र को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान योगेश मीणा के रूप में हुई है, जो छात्र राजनीति में सक्रिय रहा है और दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ चुका है।
पुलिस का दावा है कि श्रमिक हिंसा के पीछे रची गई कथित साजिश में योगेश मीणा की महत्वपूर्ण भूमिका थी और उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तथा व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए माहौल को प्रभावित करने का प्रयास किया।
डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तारी
नोएडा पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान मिले डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर योगेश मीणा को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। वह मूल रूप से राजस्थान के जयपुर का निवासी बताया जा रहा है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों के जरिए श्रमिकों के बीच भ्रम और असंतोष फैलाने की कोशिश कर रहा था, जिससे हालात तनावपूर्ण बने।
सोशल मीडिया पर फैलाए गए दावों की जांच
पुलिस के मुताबिक, हिंसा के दौरान और उसके बाद कई व्हाट्सएप ग्रुप्स में यह संदेश प्रसारित किया गया था कि नोएडा पुलिस के एक अधिकारी का कथित चालक आंदोलन से जुड़े लोगों के संपर्क में है और उन्हें प्रभावित कर रहा है।
जांच में यह दावा भ्रामक पाया गया। पुलिस का कहना है कि जिस व्यक्ति का नाम सामने आया था, उसका किसी पुलिस अधिकारी से कोई संबंध नहीं था।
पहले गिरफ्तार हो चुका है अनिल
पुलिस ने बताया कि कथित चालक अनिल को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में दोनों आरोपियों के बीच लगातार संपर्क के संकेत मिले हैं।
अधिकारियों के अनुसार, हिंसा वाले दिन भी दोनों के बीच बातचीत हुई थी। पुलिस का दावा है कि दोनों ने मिलकर श्रमिकों को उकसाने और माहौल बिगाड़ने में भूमिका निभाई।
दिशा फाउंडेशन से जुड़ाव की भी जांच
जांच एजेंसियां आरोपी के कुछ संगठनों और समूहों से संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस के अनुसार, योगेश मीणा का नाम दिशा फाउंडेशन से भी जुड़ा हुआ सामने आया है। हालांकि इस संबंध में विस्तृत जांच जारी है।
पत्रकार की जमानत याचिका खारिज
इसी मामले में जिला अदालत ने पत्रकार सत्यम वर्मा की जमानत याचिका भी खारिज कर दी है। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दावा किया कि आरोपी का संबंध ऐसे मीडिया प्लेटफॉर्म से था, जिसने घटनाक्रम का लाइव प्रसारण किया, जिससे हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए।
400 कंपनियों में हुई थी तोड़फोड़
13 अप्रैल को हुई हिंसा के दौरान औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। पुलिस के अनुसार:
करीब 400 कंपनियों में तोड़फोड़ की गई
30 से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया
कई औद्योगिक इकाइयों का उत्पादन प्रभावित हुआ
करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई गई
जांच नए चरण में पहुंची
पुलिस का कहना है कि मामले में जुटाए गए सभी डिजिटल, तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्यों को अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, योगेश मीणा की गिरफ्तारी के बाद जांच अब नए चरण में प्रवेश कर चुकी है और साजिश के अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क, सोशल मीडिया गतिविधियों और हिंसा से जुड़े संभावित अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।