UP Government Spending पर बड़ा खुलासा, एक महीने में खप गया 18% बजट

UP News में इस बार budget spending को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। पूरे साल अपेक्षाकृत धीमी गति से खर्च करने वाले उत्तर प्रदेश के कई सरकारी विभागों ने मार्च महीने में अचानक खर्च की रफ्तार तेज कर दी। नतीजा यह रहा कि सिर्फ एक महीने में ही 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च कर दी गई, जो पूरे साल के कुल खर्च का लगभग 18 प्रतिशत है।

वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में budget utilization की इस तेज रफ्तार ने एक बार फिर सरकारी विभागों के March-end spending pattern पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

साल के आखिरी दिनों में मची रही बजट खर्च की होड़

मार्च के अंतिम दिन तक राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में budget rush साफ दिखाई दिया। शासन स्तर पर लगातार financial approvals जारी होते रहे, जबकि दूसरी ओर कई जिलों से ऐसी राशि को लेकर surrender proposals भी भेजे जाते रहे, जिसे समय पर खर्च नहीं किया जा सका।

स्थिति यह रही कि देर शाम तक शासन और ट्रेजरी कार्यालय सिर्फ इसी काम में लगे रहे। यानी जहां एक ओर कुछ विभाग आखिरी समय में तेजी से बजट खर्च करने में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर कुछ विभाग आवंटित धनराशि का उपयोग ही नहीं कर पाए।

8.65 लाख करोड़ के बजट में अब तक कितना खर्च?

जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुपूरक बजट सहित राज्य सरकार ने कुल 8.65 लाख करोड़ रुपये का बजट पारित कराया था।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक:

5.94 लाख करोड़ रुपये तक की financial approvals जारी की जा चुकी थीं
जबकि आधिकारिक तौर पर लगभग 5.77 लाख करोड़ रुपये की राशि खर्च भी की जा चुकी थी

यह आंकड़ा बताता है कि सरकार की ओर से बड़ी मात्रा में धनराशि विभागों को जारी की गई और उसका बड़ा हिस्सा मार्च में तेजी से खपाया गया।

फरवरी तक खर्च कम, मार्च में अचानक तेज हुई रफ्तार

अगर पूरे वित्तीय वर्ष की गति को देखें, तो तस्वीर और भी दिलचस्प हो जाती है।

इस साल फरवरी तक वास्तविक रूप से करीब 4.76 लाख करोड़ रुपये ही खर्च किए गए थे। यानी मार्च में सिर्फ एक महीने के भीतर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त spending हुई।

यह दिखाता है कि कई विभागों ने पूरे साल की तुलना में आखिरी महीने में कहीं ज्यादा आक्रामक तरीके से fund utilization किया।

आंकड़ों में और बढ़ोतरी संभव

हालांकि, उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों में अभी और बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि कोषवाणी के डेटा में 7 से 8 प्रतिशत तक का update delay संभव है। यानी जैसे-जैसे अंतिम एंट्री और अपडेट पूरे होंगे, खर्च का वास्तविक आंकड़ा और ऊपर जा सकता है।

इसका मतलब है कि मार्च में कुल खर्च का दायरा और बड़ा भी दिखाई दे सकता है।

लोक निर्माण विभाग ने 83% तक बजट खर्च किया

लोक निर्माण विभाग (PWD) उन प्रमुख विभागों में शामिल रहा, जिसने अपने बजट का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल किया। विभाग से करीब 83 प्रतिशत budget utilization की जानकारी सामने आई है।

यह बताता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण से जुड़े विभागों में मार्च के दौरान कामकाज और बिलिंग दोनों तेज रफ्तार से आगे बढ़े।

आखिरी दिन कॉलेजों को भेजी गई सेमिनार और वर्कशॉप की राशि

उच्च शिक्षा विभाग ने भी वित्तीय वर्ष के अंतिम दौर में तेज सक्रियता दिखाई। जानकारी के अनुसार, लगभग 50 डिग्री कॉलेजों को आनन-फानन में seminar, symposium और workshop के लिए राशि जारी की गई।

वर्ष 2025-26 के बजट के तहत अलग-अलग कॉलेजों को 10 हजार रुपये से 25 हजार रुपये तक की धनराशि भेजी गई। यह कदम भी मार्च के अंतिम चरण में हुए last-minute fund release का उदाहरण माना जा रहा है।

लखनऊ ट्रेजरी में अंतिम दिन रात 12 बजे तक पास हुए बिल

राजधानी लखनऊ में वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन कलेक्ट्रेट ट्रेजरी में देर रात तक काम चलता रहा। जानकारी के अनुसार, वहां रात 12 बजे तक 2380 करोड़ रुपये के बिल पास किए गए।

यह स्थिति बताती है कि fiscal year closing के आखिरी घंटों तक विभागों में बजट को समायोजित करने और खर्च को अंतिम रूप देने की होड़ बनी रही।

कई विभाग रहे लेटलतीफ

अंतिम दिन भी कई विभाग समय पर अपनी प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके। इनमें सेतु निगम सबसे ज्यादा लेटलतीफ विभागों में शामिल रहा।

इसके अलावा:

उच्च शिक्षा विभाग
स्टाम्प विभाग
और करीब दर्जन भर अन्य विभाग

के अधिकारी भी देर से ट्रेजरी पहुंचे। इससे यह साफ है कि financial year-end management को लेकर कई विभागों में अंतिम समय तक भागदौड़ बनी रही।

कृषि विभाग ने 92.61% बजट किया खर्च

कृषि विभाग ने भी इस वित्तीय वर्ष में अपने बजट का बड़ा हिस्सा उपयोग किया। जानकारी के मुताबिक, विभाग की लगभग तीन दर्जन योजनाओं में अंतिम दिन तक 92.61 प्रतिशत राशि खर्च की जा चुकी थी।

वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग को कुल 7,051.85 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इससे यह संकेत मिलता है कि कृषि से जुड़ी योजनाओं में budget utilization का स्तर काफी ऊंचा रहा।

पर्यटन विभाग ने 96% तक बजट खपाया

अगर सबसे अधिक बजट इस्तेमाल करने वाले विभागों की बात करें, तो पर्यटन विभाग सबसे आगे नजर आता है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार:

कुल 1801.30 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान था
जिसमें से 1729.22 करोड़ रुपये तक की राशि स्वीकृत की जा चुकी है
यानी लगभग 96 प्रतिशत budget utilization

उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में tourism infrastructure, destination development और visitor facilities को देखते हुए यह खर्च महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संस्कृति विभाग ने भी 93% बजट खर्च किया

संस्कृति विभाग ने भी इस साल अपने बजट का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल किया। विभाग द्वारा लगभग 93 प्रतिशत budget खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इससे साफ है कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संरचनाओं और संबंधित योजनाओं में भी वर्ष के अंतिम दौर में काफी तेजी से धनराशि खर्च की गई।

क्या फिर वही “मार्च रश” वाली तस्वीर?

हर साल की तरह इस बार भी उत्तर प्रदेश में March rush spending की तस्वीर साफ दिखाई दी। विशेषज्ञों की नजर में यह पैटर्न कई सवाल खड़े करता है:

क्या विभाग पूरे साल योजनाबद्ध तरीके से खर्च नहीं कर पाते?
क्या फाइलें और मंजूरियां आखिरी महीनों तक अटकी रहती हैं?
क्या मार्च के दबाव में खर्च की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है?

यही वजह है कि सिर्फ खर्च की मात्रा नहीं, बल्कि quality of expenditure भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है।

UP Budget 2025-26 के आंकड़े यह साफ दिखाते हैं कि राज्य के कई विभागों ने पूरे साल की तुलना में मार्च में कहीं ज्यादा तेज रफ्तार से खर्च किया। सिर्फ एक महीने में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की spending होना यह बताता है कि वित्तीय वर्ष के अंत में budget utilization pressure कितना अधिक था।

अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पैसा कितना खर्च हुआ, बल्कि यह भी है कि वह कितनी योजना, पारदर्शिता और प्रभावशीलता के साथ खर्च किया गया।