क्या रद्द होगा Waqf Amendment Act? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले बढ़ा विवाद

Waqf Amendment Act 2025 को लेकर आज  यानी 16 अप्रैल को Supreme Court of India में बेहद अहम सुनवाई होने जा रही है। Chief Justice Sanjiv Khanna, न्यायमूर्ति P.V. Sanjay Kumar और K.V. Viswanathan की पीठ 20 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई करेगी, जिनमें इस नए वक्फ कानून की संवैधानिक वैधता (constitutional validity) को चुनौती दी गई है।

इन याचिकाओं में दावा किया गया है कि Waqf Law 2025 संविधान के Right to Equality और Freedom of Religion जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

 क्या है वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर विवाद?

Waqf Amendment Act 2025 को लेकर जो मुख्य आपत्ति उठाई गई है, वह इसके कुछ प्रावधानों को लेकर है—विशेष रूप से वे प्रावधान जो Central Waqf Council और State Waqf Boards में non-Muslim representation को रोकते हैं।

कुछ याचिकाओं में मांग की गई है कि इस कानून पर interim stay (अंतरिम रोक) लगाई जाए, लेकिन केंद्र सरकार ने caveat दायर कर यह आग्रह किया है कि बिना उसका पक्ष सुने Supreme Court कोई आदेश ना दे।

कौन-कौन हैं याचिकाकर्ता?

वक्फ कानून को चुनौती देने वालों में कई प्रमुख नेता, संगठन और एक्टिविस्ट शामिल हैं:

  • Asaduddin Owaisi (AIMIM प्रमुख)
  • Imran Pratapgarhi और Mohammad Javed (Congress MPs)
  • Arshad Madani (Jamiat Ulema-e-Hind)
  • All India Muslim Personal Law Board
  • Association for Protection of Civil Rights (APCR)
  • Mahua Moitra (TMC MP), Manoj Jha (RJD), A. Raja (DMK), Amanatullah Khan (AAP), YSR Congress के प्रतिनिधि

इन याचिकाओं में मांग की गई है कि Waqf Act 1995 और इसके संशोधन 2025 दोनों को unconstitutional घोषित किया जाए।

कौन कर रहे हैं समर्थन?

जहां कई याचिकाकर्ता इस कानून के विरोध में हैं, वहीं राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, असम, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे सात राज्यों की सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट में intervention applications दाखिल कर Waqf Amendment Act 2025 का समर्थन किया है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा वकील Harishankar Jain और Parul Kheda ने?

Supreme Court advocates Harishankar Jain और Parul Kheda (उत्तर प्रदेश निवासी) ने याचिका दाखिल कर दावा किया है कि Waqf Act 1995 स्वयं में non-Muslims के साथ भेदभाव करता है। उन्होंने मांग की है कि इस कानून के अंतर्गत जारी कोई भी आदेश या अधिसूचना Hindus और अन्य non-Muslim communities की संपत्ति पर लागू न हो।

आज की सुनवाई सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह भारत के secular structure, minority rights, और constitutional harmony की परीक्षा है। क्या Supreme Court इस कानून को रद्द करेगा या संशोधित करने का सुझाव देगा, यह देखने वाली बात होगी।