स्पेस टेक्नोलॉजी से हिमालय को मिलेगा नया जीवन? देहरादून में हुआ बड़ा सम्मेलन

ISRO Latest Rocket Launch 2025: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब एक ऐसा heavy-lift launch vehicle तैयार कर रहा है, जो पृथ्वी की Low Earth Orbit (LEO) में 75,000 किलोग्राम वजन तक के सैटेलाइट को स्थापित कर सकेगा। यह अब तक का भारत का सबसे शक्तिशाली रॉकेट होगा, जो 27 दिनों में अपना मिशन पूरा करेगा। ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने यह जानकारी देहरादून में आयोजित Space Technology Conference में दी।

मुख्यमंत्री धामी का संकल्प – “विकसित भारत, श्रेष्ठ उत्तराखंड”

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि space science हिमालयी क्षेत्र जैसे दुर्गम इलाकों में विकास की दिशा को पूरी तरह बदल सकती है। उन्होंने PM Narendra Modi के Viksit Bharat Vision 2047 की सराहना करते हुए कहा कि “उत्तराखंड भी इस मिशन का सक्रिय भागीदार बनेगा।” उन्होंने ISRO scientists, startups और innovators को विज्ञान और तकनीक में आगे आने का आह्वान किया।

2030 तक Space Station और 2040 तक चांद पर मानव मिशन का लक्ष्य

ISRO प्रमुख ने बताया कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक अपना स्पेस स्टेशन (Indian Space Station) स्थापित करना है और 2040 तक मानव को चंद्रमा पर भेजना। भारत ने 1963 में पहला रॉकेट लॉन्च किया था और 1975 तक अपने उपग्रह नहीं थे, लेकिन अब भारत के पास 131 operational satellites हैं, जो TV broadcast, weather forecast, GPS navigation और disaster management में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

चांद से लेकर सूर्य तक भारत ने रचे कीर्तिमान

डॉ. नारायणन ने बताया कि कभी भारत के रॉकेट साइकिल पर ले जाए जाते थे, लेकिन आज देश कई वैश्विक रिकॉर्ड कायम कर चुका है:

  • Chandrayaan-1 के ज़रिए चांद पर पानी की खोज करने वाला पहला देश

  • Chandrayaan-3 से चंद्रमा के South Pole पर सफल लैंडिंग करने वाला पहला देश

  • Aditya L-1 Mission से सूर्य का अध्ययन करने वाला चौथा देश

  • पहले ही प्रयास में Mars Orbit Mission (Mangalyaan) को सफल बनाने वाला पहला देश

प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में ISRO ने तेज़ी से प्रगति की है और ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कही ये बात

यूकॉस्ट के महानिदेशक निदेशक यूसैक और नोडल अधिकारी स्पेस मीट, प्रो. दुर्गेश पंत ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि उत्तराखंड में यह इस दशक में पहली बार इस तरह की किसी राज्य स्तरीय स्पेस मीट का आयोजन किया गया है। उन्होंने हिमालयी राज्यों के अनुभवों को विकसित भारत 2047 की दिशा में महत्वपूर्ण बताया और इस क्षेत्र में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग पर गंभीर विमर्श की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देव भूमि के साथ -साथ युक्ति भूमि भी है और हम स्पेस साइंस के क्षेत्र में सतत प्रौद्योगिकीय समाधान ढूंढ़ने की और अग्रसर हैं जो पारिस्थितिकीय और अर्थव्यवस्था के बीच भी संतुलन स्थापित करेंगे।

उत्तराखंड में सैटेलाइट तकनीक से आपदा प्रबंधन और वन संरक्षण को नई दिशा

NRSC (National Remote Sensing Centre) के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान ने बताया कि अंतरिक्ष डाटा का उपयोग अब disaster mapping, forest fire detection, glacier lake monitoring, cloudburst prediction जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है। ऋषिगंगा-चमोली आपदा के समय सेटेलाइट की मदद से real-time mapping की गई, जिसे बाद में Post Disaster Need Assessment (PDNA) में शामिल किया गया।

उत्तराखंड में पशुधन का डिजिटल डाटा, वन क्षेत्र की निगरानी, और भूस्खलन जैसी घटनाओं की भविष्यवाणी में भी Earth Observation Satellites की मदद ली जा रही है।

इस अवसर पर ‘आदर्श चंपावत जियो-पोर्टल यूजर मैनुअल’ का विमोचन भी किया गया, जो जिला स्तरीय योजना निर्माण और ई-गवर्नेंस में अंतरिक्ष तकनीक के प्रयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।

कार्यक्रम के अंतर्गत “मनन, चिंतन और मंथन” विषय पर आधारित तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। इनमें शहरी विकास, सूचना, जल संसाधन, आपदा प्रबंधन, वन एवं पर्यावरण, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि विभागों के सचिवों, विभागाध्यक्षों व अधिकारियों ने भाग लिया।

राज्य स्तरीय स्पेस मीट 2025 सार्थक सुझावों एवं सकारात्मक भविष्य की रूपरेखा के साथ संपन्न हुई। यह आयोजन उत्तराखंड को भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक सक्रिय भागीदार और विकसित भारत 2047 के विजन में एक महत्त्वपूर्ण सहभागी के रूप में स्थापित करता है।