सिर्फ 6 सीटें क्यों? कांग्रेस ने खुद बताया अपनी हार के 8 बड़े कारण

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कांग्रेस की खराब परफॉर्मेंस ने पार्टी नेतृत्व को गंभीर समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है। चुनाव में मात्र 6 सीटें और 6.09% वोट शेयर मिलने के बाद पार्टी ने दिल्ली में लंबी समीक्षा बैठकों का दौर शुरू किया। इन बैठकों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, के.सी. वेणुगोपाल समेत करीब 70 उम्मीदवार और सांसद शामिल हुए। सभी ने हार के कारणों पर खुलकर चर्चा की और कई अहम पहलुओं की ओर ध्यान दिलाया।

कांग्रेस की हार के सामने आए 8 बड़े कारण

1. स्थानीय मुद्दों की अनदेखी

बैठकों में कई नेताओं ने माना कि पार्टी ने SIR यानी “Special Intensive Revision” और alleged “Vote Fraud Narrative” पर ज्यादा फोकस किया, जबकि inflation, unemployment, migration, corruption और local development जैसे मसलों पर मजबूत campaigning नहीं हो पाई।

2. EVM और SIR पर अत्यधिक जोर

केसी वेणुगोपाल ने बैठक के बाद कहा कि यह mandate “managed” और “manipulated” था। उनका आरोप था कि EVM और administrative setup का misuse हुआ। लेकिन कई नेताओं ने यह भी कहा कि excessive complaining ने पार्टी की छवि कमजोर की।

3. RJD के साथ गठबंधन पर असहमति

कुछ नेताओं ने कहा कि RJD alliance से core vote bank तो मिल सकता है, लेकिन polarisation की वजह से अन्य communities का वोट खिसक गया। कुछ नेताओं ने RJD से समय रहते दूरी बनाने की मांग भी उठाई। हालांकि राहुल गांधी ने सवाल किया कि जहां friendly contest यानी “Friendly Contest Seats” थे, वहां भी कांग्रेस क्यों हार गई?

4. AIMIM के कारण वोट बंटवारा

सीमांचल और आसपास के क्षेत्रों में AIMIM को minority vote split के लिए जिम्मेदार बताया गया। कई स्थानीय नेताओं ने कहा कि secular votes unified strategy के बिना divided हो गए।

5. चुनाव के दौरान Direct Benefit Transfer का असर

कई कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि चुनाव से पहले महिलाओं को directly 10,000 रुपए दिए गए, जिसका बड़ा चुनावी फायदा NDA को मिला। इससे Women Voters का swing decisively government के पक्ष में गया।

6. बूथ-level manipulation के आरोप

कई सदस्यों ने आरोप लगाया कि local booth level पर Livelihood Workers यानी “Jeevika Didis” के जरिए voters को influence किया गया। आरोप ये भी लगे कि booth capturing नहीं, लेकिन booth influence strategy लागू की गई।

7. जवाबदेही का सवाल

एक नेता ने 2019 के लोकसभा चुनाव का उदाहरण देकर कहा कि accountability तय किए बिना पार्टी दोबारा mistakes repeat कर रही है। इसे पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और state प्रभारी पर indirect criticism माना गया।

8. जाति जनगणना और political messaging की कमी
कुछ नेताओं ने कहा कि caste census को central narrative बनाया गया, लेकिन इसका execution weak रहा। उनका दावा था कि कुछ caste blocs की representation population ratio नहीं, बल्कि political outreach के आधार पर होनी चाहिए थी।

अब आगे की रणनीति क्या?

कांग्रेस अब Bihar में organisational restructuring, booth level strengthening, digital outreach campaign और updated narrative building की plan तैयार कर रही है। पार्टी के नेताओं का मानना है कि upcoming Lok Sabha और अगला Assembly Election उनकी strategy का real testing ground होगा।