Why is the biggest documentary ever being made about Indramani Badoni? The answer will surprise you.
उत्तराखंड के गांधी कहलाए जाने वाले जननायक इंद्रमणि बडोनी की 100th Birth Anniversary पर उनके जीवन और संघर्ष पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म तैयार की जा रही है। ‘उत्तराखंड के जननायक इंद्रमणि बडोनी’ (Documentary on Indramani Badoni) का फिल्मांकन गुरुवार को मसूरी के शहीद स्थल में हुआ, जहां प्रसिद्ध गढ़वाली गीत ‘कु होलु’ सहित कई दृश्य कैमरे में कैद किए गए।
यह डॉक्यूमेंट्री Mussoorie Winterline Carnival 2024 में पहली बार प्रदर्शित की जाएगी। फिल्म के मुहूर्त शॉट का क्लैप पूर्व पालिका अध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल और सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश ढौंडियाल ने दिया।
डायरेक्टर प्रदीप भंडारी की पहल: नई पीढ़ी तक पहुंचेगी बडोनी की संघर्ष गाथा
डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक प्रदीप भंडारी ने बताया कि 24 दिसंबर को इंद्रमणि बडोनी की 100वीं जयंती बड़े स्तर पर मनाई जाएगी और इसी दिन फिल्म का भव्य प्रीमियर भी प्रस्तावित है।
उन्होंने कहा कि—
“बडोनी जी उत्तराखंड राज्य आंदोलन के सच्चे जननायक थे। उनके विचार, संघर्ष और राज्य निर्माण में निभाई गई भूमिका से आज कई बच्चे अनजान हैं। यह डॉक्यूमेंट्री उन्हें उसी सच से रूबरू कराएगी।”
शहीद स्थल में हुआ महत्वपूर्ण शूट, शिक्षा विभाग पर भी सवाल
प्रदीप भंडारी ने शिक्षा विभाग पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूलों में अब तक बडोनी पर आधारित कोई ठोस पाठ्यक्रम शामिल नहीं किया गया है, जिससे बच्चों को उनके योगदान की जानकारी मिल सके।
उन्होंने कहा कि गढ़वाली संस्कृति और इतिहास को समझाने के लिए ऐसे कंटेंट की जरूरत है।
प्रदीप इससे पहले भी गढ़वाली संस्कृति पर आधारित फिल्म ‘पितृ कूड़ा’ बना चुके हैं, जिसे सराहना मिली थी।
“हर बच्चा जाने बडोनी कौन थे” – निर्देशक प्रदीप भंडारी
निर्देशक ने बताया कि फिल्म में ‘कु होलु’ गीत को इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि पुराने समय में पहाड़ों में मीडिया न होने के कारण घड़िया गीत ही communication का माध्यम होते थे।
गीत के माध्यम से भी बडोनी के जीवन की झलकियां दिखाईं जाएंगी।
डॉक्यूमेंट्री में बडोनी के संघर्ष और राज्य आंदोलन की कहानी
फिल्म में शामिल मुख्य विषय
इंद्रमणि बडोनी का जन्म, व्यक्तित्व और वैचारिक यात्रा
उत्तराखंड राज्य आंदोलन में उनकी भूमिका
अहिंसक संघर्ष, गांधीवादी सोच
पहाड़ की संस्कृति और सामाजिक बदलाव
निर्देशक का कहना है कि यह डॉक्यूमेंट्री “बडोनी जी को श्रद्धांजलि और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा” है।
इंद्रमणि बडोनी: पहाड़ के गांधी कैसे बने? (Who was Indramani Badoni)
जन्म और प्रारंभिक जीवन
इंद्रमणि बडोनी का जन्म 24 दिसंबर 1925 को टिहरी गढ़वाल के अखोड़ी गांव में हुआ।
पिता: सुरेशानंद
माता: कलदी देवी
उन्होंने 1949 में DAV PG College Dehradun से ग्रेजुएशन पूरा किया।
1953 में गांधीवादी कार्यकर्ता मीरा बहन से मुलाकात के बाद उनके भीतर अहिंसक संघर्ष की सोच गहरी हुई।
राजनीतिक जीवन में प्रभाव
1961: ग्राम प्रधान और ब्लॉक प्रमुख बने
1967: देवप्रयाग से पहली बार निर्दलीय विधायक चुने गए
1969: कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीत
1977: जनता लहर के बावजूद निर्दलीय जीतकर दोनों बड़े दलों की जमानत जब्त करा दी
1989: हार के बावजूद राज्य आंदोलन की जंग जारी रखी
बडोनी की पहचान पूरे उत्तर प्रदेश में एक मजबूत जननेता के रूप में बनी।
‘माउंटेन गांधी’ की उपाधि
अमेरिकी अखबार The Washington Post ने इंद्रमणि बडोनी को ‘Mountain Gandhi’ कहा था।
इसके बाद से वे ‘पहाड़ के गांधी’ के नाम से पूरे उत्तराखंड में मशहूर हुए।
हालांकि वे उत्तराखंड राज्य बनते नहीं देख पाए, लेकिन आंदोलन में उनका योगदान अमिट है।