बिहार SIR में Aadhaar क्यों नहीं मान्य? जानिए चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी
बिहार में Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच Election Commission of India (ECI) ने Supreme Court में हलफनामा दाखिल कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा है कि Aadhaar Card को वोटर योग्यता प्रमाण के तौर पर मानना संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
Aadhaar को 11 Documents की सूची से क्यों हटाया गया?
ECI ने अपने 88-पेज के हलफनामे में कहा कि Aadhaar केवल पहचान का साधन है, यह Article 326 के तहत मतदाता की योग्यता (Eligibility) साबित नहीं करता। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जो 11 दस्तावेजों की लिस्ट दी गई है, वह कोई अंतिम सूची नहीं बल्कि एक indicative list है।
EC का दावा: 90% से ज़्यादा मतदाताओं ने भरा Enumeration Form
आयोग ने जानकारी दी है कि बिहार में अब तक 90% से अधिक वोटर्स ने अपना enumeration form (गणना फॉर्म) भर दिया है और किसी को भी मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाएगा। खासकर marginalized और disadvantaged communities के लिए आयोग विशेष प्रयास कर रहा है।
Campaign Objective: आयोग ने कहा कि इस विशेष पुनरीक्षण का उद्देश्य voter list credibility को लेकर जनता का विश्वास फिर से स्थापित करना है।
Supreme Court में EC की कानूनी दलीलें
ECI ने अदालत में दलील दी:
“मतदान का अधिकार नागरिकता, आयु और सामान्य निवास जैसे योग्यता मानकों पर आधारित होता है – जो Representation of the People Act, 1950 (Sections 16 और 19) और Article 326 के तहत आते हैं। ऐसे में केवल आधार रखने मात्र से कोई व्यक्ति मतदाता नहीं बन सकता।”
EC ने यह भी जोड़ा कि Articles 19 और 21 के तहत यह याचिका सही नहीं ठहरती क्योंकि यहां बात “अधिकार” की नहीं, “योग्यता” की है।
अगली सुनवाई 28 जुलाई को, विपक्षी दलों की मांग – आदेश रद्द हो
Supreme Court ने 10 जुलाई को इस मामले पर सुनवाई करते हुए EC को निर्देश दिया था कि वह 21 जुलाई तक जवाब दाखिल करे। अब अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
ECI के 24 जून 2025 के आदेश को कांग्रेस, TMC, RJD, NCP, CPI, Shiv Sena (UBT), और JMM जैसे दलों ने arbitrary और unconstitutional बताते हुए चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि यह आदेश Articles 14, 19, 21, 325, 326 और Representation of the People Act, 1950 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।
यदि इसे रद्द नहीं किया गया, तो लाखों वोटर्स बिना proper verification के voting rights से वंचित हो सकते हैं।