Uttarakhand News: Demand for separate satellite system for Himalayan states, new proposal before the center to deal with disasters
उत्तराखंड का यह प्रस्ताव हिमालयी क्षेत्र में disaster resilience बढ़ाने की दिशा में एक path-breaking initiative साबित हो सकता है। केंद्र सरकार यदि इस पर अमल करती है, तो यह मॉडल न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के पर्वतीय देशों के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
उत्तराखंड ने अब आपदाओं से निपटने के लिए एक high-tech solution की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से हिमालयी राज्यों के लिए एक अलग Satellite Constellation (सैटेलाइट समूह) बनाने की मांग की है, जो विशेष रूप से भूस्खलन, बाढ़ और हिमपात जैसी आपदाओं की सटीक चेतावनी देने में मदद करेगा।
यह मांग दिल्ली में हाल ही में हुई Space Meet 2025 के दौरान रखी गई, जहाँ उत्तराखंड के आईटी सचिव नितेश झा ने राज्य में आपदाओं की पूर्व तैयारी और बचाव कार्यों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
क्यों जरूरी है अलग Satellite System?
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में हर साल landslide, cloudburst और flash flood जैसी प्राकृतिक आपदाएँ जान-माल का भारी नुकसान करती हैं। इस कारण राज्य ने केंद्र से अनुरोध किया है कि हिमालय क्षेत्र की भौगोलिक विशिष्टताओं को ध्यान में रखते हुए एक समर्पित सैटेलाइट समूह तैयार किया जाए।
यह सिस्टम real-time data उपलब्ध कराएगा जिससे आपदा की early warning system को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
Space Meet में उत्तराखंड का प्रस्ताव
High Resolution Satellite Images: राज्य ने ऐसे सैटेलाइट चित्रों की मांग की है जिनकी स्पष्टता 50 सेंटीमीटर से कम हो। इनसे पहाड़ी इलाकों की सटीक mapping और monitoring संभव हो सकेगी।
LIDAR और DEM Technology: इन तकनीकों से ऊँचाई और स्थलाकृति (terrain) की सटीक जानकारी मिल सकेगी, जिससे landslide prone zones की पहचान की जा सकेगी।
Climate Observatory Setup: जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों की निरंतर निगरानी के लिए राज्य ने Dedicated Climate Observatory स्थापित करने का सुझाव भी दिया है।
भविष्य की तैयारी – Disaster Management 2.0
सचिव नितेश झा ने बताया कि यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो राज्य में एक Integrated Disaster Management Model तैयार किया जाएगा। इससे न केवल पूर्व चेतावनी मिल सकेगी बल्कि राहत और बचाव कार्य भी तेज और सटीक होंगे।
यह सिस्टम हिमालयी राज्यों — जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश — के लिए एक common satellite network के रूप में काम कर सकता है, जो मौसम, जलस्तर और हिमपात के accurate डेटा प्रदान करेगा।