Uttarakhand Anti-Conversion Law: नए संशोधनों के बाद क्या बदलेंगे नियम?

उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने Religious Freedom Act में प्रमुख संशोधन मंजूर किए हैं। नए संशोधन force, fraud और inducement जैसे तरीकों से धर्मांतरण रोकने के लिए कड़े प्रावधान लाते हैं। प्रस्तावित बदलावों में punishment बढ़ाने के साथ-साथ कानून की परिभाषा भी विस्तृत की गई है।

उत्तराखंड का Religious Freedom Act क्या है?

Uttarakhand Religious Freedom Act 2018 किसी भी misrepresentation, coercion, undue influence या inducement के जरिए धर्मांतरण पर रोक लगाता है।

यह कानून धर्मांतरण को cognizable और non-bailable offense बनाता है।

सजा: 3 से 10 साल imprisonment और minimum ₹50,000 fine।

अदालत आरोपी को पीड़ित को ₹5 लाख तक compensation देने का आदेश दे सकती है।

नए संशोधन में क्या शामिल है?

उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने Religious Freedom (Amendment) Bill 2025 को मंजूरी दी। सरकार के अनुसार, ये बदलाव नागरिकों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा करेंगे और social harmony बनाए रखेंगे।

मुख्य बदलाव:

Digital और Online Medium Restriction:

सोशल मीडिया, messaging apps या किसी अन्य डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण को बढ़ावा देना या उकसाना अपराध होगा।

Inducement Definition का विस्तार:

Gifts, cash/commodity benefits, employment, free education, marriage promises, religious persuasion शामिल।

इन सभी को अपराध की श्रेणी में रखा गया।

सजा और दंड का प्रावधान:

सामान्य उल्लंघन: 3-10 साल imprisonment

संवेदनशील वर्ग से जुड़े मामले: 5-14 साल imprisonment

गंभीर या फर्जी पहचान/धर्म छिपाकर विवाह करने वाले मामलों में: 20 साल से life imprisonment और भारी fines।

पीड़ितों के अधिकार और सुरक्षा:

अवैध धर्मांतरण के पीड़ितों को protection, rehabilitation, medical, travel और maintenance support।

विशेषज्ञों का मानना

विशेषज्ञों का कहना है कि यह संशोधित कानून Uttarakhand law enforcement को मजबूत करेगा और धर्मांतरण से जुड़ी धोखाधड़ी और coercion को रोकने में मदद करेगा।