Trump Vs Migrants: 225 साल पुराने कानून ने पलटा केस, जानिए Alien Enemies Act का पूरा सच
ट्रंप को मिली राहत, लेकिन उठे कई सवाल: क्या 225 साल पुराना Alien Enemies Act आज भी जायज है?
Washington D.C. – Illegal Immigration के मुद्दे पर अमेरिका की Supreme Court से पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump को बड़ी राहत मिली है। वेनेजुएला के प्रवासियों (Venezuelan Immigrants) को डिपोर्ट करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले को अदालत ने सशर्त मंजूरी दे दी है। इस फैसले के पीछे जिस कानून का हवाला दिया गया है, वह है Alien Enemies Act, जो साल 1798 में पास हुआ था। इस पुराने कानून की वापसी ने अमेरिका में बहस को तेज कर दिया है।
क्या है Alien Enemies Act?
Alien Enemies Act अमेरिका का एक Federal Law है जिसे 1798 में पारित किया गया था। यह राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि युद्ध, संकट या National Security Threat की स्थिति में किसी विदेशी नागरिक को यदि “enemy nation” का हिस्सा माना जाए, तो उसे हिरासत में लिया जा सकता है या देश से निकाला जा सकता है, वह भी बिना मुकदमे या सुनवाई के।
इस कानून का सबसे प्रमुख इस्तेमाल World War II के दौरान देखा गया था, जब जापानी, जर्मन और इतालवी मूल के अमेरिकियों को टारगेट किया गया था।
ट्रंप ने क्यों किया इस कानून का इस्तेमाल?
2025 में ट्रंप ने इस कानून को फिर से सक्रिय किया और सैकड़ों Venezuelan Migrants को El Salvador की जेलों में भेजने की योजना बनाई। उनका तर्क था कि ये प्रवासी अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा हैं और इस कानून के तहत उन्हें देश से हटाया जा सकता है।
हालांकि, इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया आई और ACLU (American Civil Liberties Union) ने इस पर अदालत में आपत्ति दर्ज की।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
Supreme Court ने अपने 5-4 के फैसले में कहा कि प्रशासन इस पुराने कानून का उपयोग कर सकता है, लेकिन प्रवासियों को due process of law और judicial hearing का पूरा अधिकार मिलना चाहिए।
जस्टिस Amy Coney Barrett ने ट्रंप प्रशासन के पक्ष में वोट किया जबकि जस्टिस Sonia Sotomayor ने कड़ी टिप्पणी में कहा, “हम एक ऐसा राष्ट्र हैं जो कानून और इंसानियत के आधार पर चलता है। हमें इससे बेहतर होना चाहिए।”
क्यों हो रहा है विवाद?
-
यह कानून 225 साल पुराना है और उस समय बनाया गया था जब अमेरिका एक नया राष्ट्र था और बाहरी हमलों से डरा हुआ था।
-
मौजूदा लोकतांत्रिक और मानवाधिकार-आधारित व्यवस्था में इस कानून को outdated और कठोर माना जा रहा है।
-
Critics का कहना है कि यह कानून राष्ट्रपति को बहुत अधिक power देता है — किसी भी व्यक्ति को बिना ट्रायल हिरासत में लेने या देश से बाहर निकालने का अधिकार।