उत्तराखंड के इन 8 रोपवे से बदलेगी कनेक्टिविटी, CM धामी ने अधिकारियों को दी 9 नवंबर की Deadline

Uttarakhand Ropeway Projects: उत्तराखंड में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए Ropeway Connectivity को मजबूत करने की दिशा में बड़ा काम चल रहा है। केदारनाथ से मसूरी तक राज्य में कुल 8 प्रमुख रोपवे प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को इन परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को तय समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इन Ropeway Projects के शुरू होने से पहाड़ी क्षेत्रों में सफर आसान होने के साथ ही सड़क मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।

सीएम धामी ने रोपवे प्रोजेक्ट की समीक्षा की

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कैंप कार्यालय में राज्य की प्रमुख रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्य की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट लक्ष्य दिए। सीएम ने कहा कि जिन जिलों में रोपवे परियोजनाएं प्रस्तावित या निर्माणाधीन हैं, वहां के जिलाधिकारी नियमित रूप से इनकी Project Monitoring करें।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण के दौरान आने वाली तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतों का संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर जल्द समाधान निकाला जाए।

रोपवे के साथ पार्किंग की सुविधा भी जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी रोपवे परियोजना को केवल Ropeway Construction तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसके साथ पर्याप्त Parking Facility भी विकसित की जाए, ताकि पर्यटकों और श्रद्धालुओं को वाहन खड़ा करने में परेशानी न हो।

इसके अलावा निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए Licensing and Approval Process को आसान और पारदर्शी बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

9 नवंबर तक धरातल पर दिखना चाहिए काम

सीएम धामी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि 9 November Deadline तक सभी रोपवे परियोजनाओं में निर्माण कार्य प्रमुख रूप से धरातल पर दिखाई देना चाहिए। इसके अलावा सभी निर्माण एजेंसियों को अगले 15 दिनों के भीतर अब तक की प्रगति की रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपनी होगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इन परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करेंगे, ताकि निर्माण कार्य में अनावश्यक देरी न हो।

सुरक्षा और पर्यावरण पर विशेष फोकस

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में रोपवे परियोजनाओं के निर्माण के साथ Passenger Safety और Environmental Protection को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन और कनेक्टिविटी से जुड़े प्रोजेक्ट स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।

हालांकि विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्य में सभी Environmental Norms का पालन किया जाए और राज्य की Economy के साथ Ecology को भी बराबर महत्व दिया जाए।

कहां-कहां बन रहे हैं 8 प्रमुख Ropeway Projects?

उत्तराखंड में चल रही प्रमुख रोपवे परियोजनाओं में धार्मिक स्थलों के साथ प्रमुख पर्यटन केंद्रों को जोड़ने वाली योजनाएं शामिल हैं।

सोनप्रयाग-गौरीकुंड-केदारनाथ Ropeway: इसकी लंबाई करीब 12.90 किलोमीटर प्रस्तावित है। यह परियोजना केदारनाथ यात्रा को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

गोविंदघाट-घांघरिया-हेमकुंड साहिब Ropeway: करीब 12.40 किलोमीटर लंबी इस परियोजना से हेमकुंड साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलने की उम्मीद है।

काठगोदाम बस स्टैंड-हनुमानगढ़ी मंदिर Ropeway: इस रोपवे की प्रस्तावित लंबाई करीब 14.90 किलोमीटर है।

जोशीमठ-औली-गौरसौं Ropeway: करीब 6.92 किलोमीटर लंबी यह परियोजना प्रमुख पर्यटन क्षेत्र औली को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिहाज से अहम है।

गौंडार-श्री मदमहेश्वर Ropeway: इसकी लंबाई करीब 6.50 किलोमीटर है। यह धार्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट है।

देहरादून-पुरकुल-मसूरी Ropeway: करीब 5.50 किलोमीटर लंबी यह परियोजना देहरादून और मसूरी के बीच बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की योजना का हिस्सा है।

यमुनोत्री Ropeway: जानकीचट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक करीब 3.39 किलोमीटर लंबा रोपवे प्रस्तावित है।

तपोवन-कुंजापुरी Ropeway: इस परियोजना की लंबाई करीब 4.84 किलोमीटर बताई गई है।

श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मिलेगी बड़ी राहत

इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उत्तराखंड में Tourism Connectivity को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, यमुनोत्री और मदमहेश्वर जैसे धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान हो सकती है। वहीं औली और मसूरी जैसे पर्यटन स्थलों पर सड़क यातायात का दबाव कम करने में भी रोपवे अहम भूमिका निभा सकते हैं।