नेपाल बाढ़: 300 से ज्यादा भारतीय लापता, भारत ने तेज किया राहत अभियान

Nepal Flood : नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण Flash Flood ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल-तिब्बत सीमा से सटे इलाकों में अचानक पानी और मलबे के तेज बहाव ने कई गांवों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया है। नेपाल के विदेश मंत्री के अनुसार, लापता 400 से अधिक विदेशी नागरिकों में करीब 300 भारतीय शामिल हैं। वहीं नेपाल में मृतकों की संख्या 165 तक पहुंचने और 826 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर, तिब्बत में भी सैकड़ों लोगों के लापता होने की खबर है। इस भयावह स्थिति के बीच भारत ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है।

नेपाल में 300 से ज्यादा भारतीय लापता

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि बाढ़ के बाद लापता हुए विदेशी नागरिकों में बड़ी संख्या भारतीयों की है। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल के रास्ते गए कई श्रद्धालु भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। नेपाल में संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण अभी सभी भारतीय नागरिकों की स्थिति की पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है। भारतीय दूतावास के साथ-साथ कई राज्यों ने भी अपने नागरिकों और उनके परिजनों की सहायता के लिए हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम सक्रिय किए हैं।

ग्लेशियर टूटने से आई तबाही

शुरुआत में इस आपदा को लेकर भूकंप की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS ने स्पष्ट किया कि भूकंप जैसी दर्ज हुई हलचल वास्तव में ग्लेशियर के ढहने और उसके बाद हुए Debris Flow से जुड़ी थी। करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटने से पानी, बर्फ, चट्टान और मलबे का बेहद तेज बहाव पैदा हुआ, जिसने निचले इलाकों में भारी तबाही मचाई।

19 पुल और 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त

बाढ़ से नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत कई इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। तेज बहाव के कारण शुरुआती आकलन में करीब 19 पुल और 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त होने की जानकारी है। करीब एक दर्जन Hydropower Projects को भी नुकसान पहुंचा है। सड़क और पुल टूटने से कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है, जिससे राहत और बचाव टीमों को मौके तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है।

भारत ने भेजी 35 टन से ज्यादा राहत सामग्री

नेपाल में फंसे लोगों की मदद के लिए भारत ने अपना Relief Operation तेज कर दिया है। भारतीय वायुसेना का C-17 विमान 35 टन से अधिक राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना किया गया है। इससे पहले भी भारत 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाइयां नेपाल भेज चुका है। भारत की ओर से स्पष्ट किया गया है कि संकट की इस घड़ी में नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

बिहार में भी बढ़ी चिंता

नेपाल में आई बाढ़ के बाद बिहार में भी प्रशासन सतर्क हो गया है। नेपाल से आने वाले पानी के कारण Gandak River और वाल्मीकिनगर बैराज के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। गंडक बैराज से पानी का डिस्चार्ज रात में बढ़कर 1.50 लाख क्यूसेक से अधिक पहुंच गया था। बाद में इसमें कमी आई, लेकिन सुबह फिर डिस्चार्ज बढ़ने लगा। ऐसे में बिहार के निचले इलाकों में भी प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।

तिब्बत में भी सैकड़ों लोग लापता

इस आपदा का असर चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी पड़ा है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, ग्यिरोंग काउंटी में सैकड़ों लोग लापता बताए गए हैं, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल और तिब्बत दोनों तरफ राहत और बचाव दल हेलीकॉप्टरों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।

पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा बड़ी चुनौती

नेपाल के प्रभावित इलाके कैलाश मानसरोवर यात्रा के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल हैं। इसलिए यहां बड़ी संख्या में भारतीय तीर्थयात्री और विदेशी पर्यटक मौजूद थे। पर्यटन अधिकारियों के मुताबिक सैकड़ों पर्यटकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लगातार खराब संपर्क व्यवस्था और सड़क-पुलों के टूटने के कारण प्रभावित लोगों तक पहुंचना बचाव एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।