ट्विशा शर्मा डेथ केस की रहस्यमयी टाइमलाइन, कब-कब मिले अहम सबूत?

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस में जांच से जुड़ी नई जानकारियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आए रिकॉर्ड के अनुसार, मामले के कई महत्वपूर्ण सबूत पुलिस को घटना की सूचना मिलने के घंटों और कुछ मामलों में कई दिनों बाद मिले। अब इस पहलू को लेकर जांच प्रक्रिया पर बहस तेज हो गई है और माना जा रहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) भी इन परिस्थितियों की गहराई से पड़ताल कर सकती है।

रिकॉर्ड बताते हैं कि 13 मई की रात करीब 12:05 बजे भोपाल स्थित AIIMS से पुलिस को ट्विशा शर्मा की मौत की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

हालांकि जांच दस्तावेजों के अनुसार, कथित तौर पर फांसी लगाने में इस्तेमाल किए गए लिगेचर मैटेरियल (स्ट्रैप/रस्सी) को उसी दिन सुबह 9:42 बजे जब्त किया गया। यानी घटना की सूचना मिलने के लगभग 10 घंटे बाद। इसी दौरान एक HP लैपटॉप और एक iPhone भी बरामद किए गए, जो कथित रूप से लॉक स्थिति में थे।

मामले में शुरू से ही ट्विशा शर्मा के परिवार ने जांच की निष्पक्षता और Crime Scene Management को लेकर सवाल उठाए हैं। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि घटनास्थल को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई, जिससे संभावित सबूतों के प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई। हालांकि आरोपियों की ओर से इन दावों को खारिज किया गया है।

जांच रिकॉर्ड के मुताबिक 13 मई को दोपहर 3:30 बजे ट्विशा के पति समर्थ सिंह द्वारा एक Samsung Galaxy मोबाइल फोन पुलिस को सौंपा गया। इसके बाद शाम 4:40 बजे कुछ मेडिकल रिकॉर्ड और दस्तावेज भी जांच टीम ने अपने कब्जे में लिए।

उसी दिन शाम 6:40 बजे घर में लगे CCTV System का DVR भी पुलिस ने जब्त किया। यह DVR परिवार की ओर से जांच अधिकारियों को सौंपा गया था। बाद में इसी CCTV फुटेज के कुछ हिस्से सार्वजनिक होने के बाद Digital Evidence Leak को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया।

सबसे अधिक चर्चा उस Sony Headphone की बरामदगी को लेकर हो रही है, जो कथित तौर पर ट्विशा शर्मा के आखिरी CCTV फुटेज में दिखाई दिया था। रिकॉर्ड के अनुसार यह हेडफोन 23 मई की रात 8:41 बजे बरामद किया गया, यानी घटना के लगभग 10 दिन बाद। इसी दौरान एक अन्य Samsung मोबाइल फोन भी जांच एजेंसियों के कब्जे में आया।

अब जांच से जुड़े प्रमुख सवाल यह हैं कि यदि घटनास्थल शुरुआत से सुरक्षित था, तो महत्वपूर्ण सबूत अलग-अलग समय पर और इतनी देरी से क्यों मिले? क्या Evidence Preservation में कोई कमी रही थी? क्या इससे जांच की दिशा प्रभावित हो सकती थी? इन बिंदुओं पर आगे की जांच में विशेष ध्यान दिया जा सकता है।

ट्विशा शर्मा केस: अहम घटनाक्रम की टाइमलाइन

12 मई (रात)
कथित तौर पर ट्विशा शर्मा ने अपने ससुराल की छत पर फांसी लगाई।

13 मई, 12:05 AM
AIIMS भोपाल ने पुलिस को मौत की सूचना दी।

13 मई, 9:42 AM
कथित लिगेचर मैटेरियल (स्ट्रैप/रस्सी), HP लैपटॉप और iPhone जब्त किए गए।

13 मई, 3:30 PM
समर्थ सिंह द्वारा सौंपा गया Samsung Galaxy मोबाइल फोन जब्त।

13 मई, 4:40 PM
मेडिकल दस्तावेज और रिकॉर्ड कब्जे में लिए गए।

13 मई, 6:40 PM
घर के CCTV सिस्टम का DVR जब्त किया गया।

15 मई
गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ FIR दर्ज हुई।

23 मई, 8:41 PM
Sony Headphone और एक अन्य Samsung मोबाइल फोन बरामद किया गया।

जांच के केंद्र में ये सवाल

कथित फांसी में इस्तेमाल स्ट्रैप 10 घंटे बाद क्यों जब्त किया गया?
Crime Scene को कब और कैसे सुरक्षित किया गया?
CCTV फुटेज सार्वजनिक कैसे हुई?
CCTV में दिखा हेडफोन 10 दिन बाद क्यों बरामद हुआ?
क्या किसी डिजिटल या भौतिक सबूत के साथ छेड़छाड़ की आशंका थी?

इन सवालों के जवाब आगे की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और यही वजह है कि ट्विशा शर्मा डेथ केस लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।