“तारीख पर तारीख” बयान पर गरमाया हाई कोर्ट, पूर्व विधायक को मांगनी पड़ी माफी

Uttarakhand High Court ने एक अहम सुनवाई के दौरान पूर्व भाजपा विधायक Rajesh Shukla को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि “यह अदालत है, कोई फिल्म नहीं चल रही”, और न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने की नसीहत दी। मामला किच्छा नगर पालिका चुनाव और सिरौलीकलां क्षेत्र को पालिका से अलग किए जाने से जुड़ा है। इस केस की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से एक वीडियो क्लिप कोर्ट में पेश की गई, जिसमें पूर्व विधायक द्वारा अदालत को लेकर विवादित बयान दिए गए थे। वीडियो सामने आने के बाद हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया।

“Court हर हफ्ते सुनवाई कर रही है” — जज की सख्त टिप्पणी

सुनवाई कर रही एकलपीठ के न्यायमूर्ति Justice Rakesh Thapliyal ने कहा कि कोर्ट लगातार हर सप्ताह मामले की सुनवाई कर रही है, इसके बावजूद अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली बातें कही जा रही हैं।
कोर्ट ने साफ किया कि सभी पक्षों को सुनने के बाद ही फैसला दिया जाएगा और किसी भी व्यक्ति को न्यायालय में अपनी बात रखने से नहीं रोका जा सकता।

पूर्व विधायक को कोर्ट में मांगनी पड़ी माफी

High Court द्वारा व्यक्तिगत रूप से तलब किए जाने के बाद पूर्व विधायक राजेश शुक्ला अदालत में पेश हुए। उन्होंने वीडियो में कही गई बातों पर खेद जताया और भविष्य में ऐसी टिप्पणी दोबारा न करने का आश्वासन दिया।
इस दौरान कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका सभी नागरिकों के लिए खुली है और कानून के दायरे में रहकर ही अपनी बात रखी जानी चाहिए।

Video Clip में क्या था?

कोर्ट में पेश किए गए वीडियो में कथित तौर पर याचिकाकर्ता पर केस वापस लेने का दबाव बनाने की बात सामने आई। साथ ही “तारीख पर तारीख” मिलने जैसी टिप्पणी भी की गई थी। इसी बयान को लेकर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।
याचिकाकर्ता के वकील Dushyant Mainali ने पुष्टि की कि वीडियो को कोर्ट रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, किच्छा के सिरौलीकलां गांव के निवासी मोहम्मद याशीन और अन्य लोगों ने Public Interest Litigation (PIL) दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि साल 2018 में किच्छा नगर पालिका का विस्तार किया गया था, जिसमें सिरौलीकलां, बंडिया, देवरिया और आजादनगर जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया।इसके बाद हुए नगरपालिका चुनाव में सिरौलीकलां क्षेत्र के कई वार्ड भी शामिल किए गए थे। हालांकि बाद में इन वार्डों को हटाया गया, लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद दोबारा शामिल किया गया।
अब क्षेत्रवासियों का आरोप है कि छह साल तक नगर पालिका का हिस्सा रहने के बाद सिरौलीकलां को फिर अलग किया जा रहा है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि क्षेत्र को नगर पालिका में बनाए रखा जाए और यहां Urban Local Body Election कराए जाएं।

Urban Development Secretary से मांगा गया जवाब

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह भी पूछा कि नगर पालिका से जुड़ी अधिसूचना जिस धारा के तहत जारी की गई थी, क्या उस कानूनी प्रावधान के तहत ऐसा करना वैध था या नहीं। कोर्ट ने Urban Development Department Uttarakhand के सचिव को इस मामले में शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई में इस पर विस्तृत जवाब पेश किया जाएगा।