Ram Mandir Donation Theft Case: नई SIT के सामने सात बड़े सवाल, आज सुप्रीम कोर्ट में पेश होगी स्टेटस रिपोर्ट

Ram Mandir Donation Theft Case की जांच अब दूसरे चरण में पहुंच चुकी है। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए नई Special Investigation Team (SIT) का गठन किया है, जिसे आज Supreme Court के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट भी पेश करनी है। नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन अहम सवालों के जवाब तलाशने की है, जिनका समाधान अब तक न पुलिस कर सकी है और न ही पहली SIT की जांच में सामने आ पाया।

पहली SIT के बाद नई जांच टीम पर बढ़ी जिम्मेदारी

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहली SIT की जांच से अदालत पूरी तरह संतुष्ट होती, तो दूसरी SIT के गठन की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे में नई जांच टीम पर पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कर सभी तथ्यों को सामने लाने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

हालांकि पुलिस की जांच अब तक केवल पहले से गिरफ्तार आठ आरोपियों तक सीमित रही है और किसी नए आरोपी को शामिल नहीं किया गया है।

इन नामों की भूमिका पर अब भी उठ रहे सवाल

जांच के दौरान पहली SIT ने अनिल मिश्र की भूमिका पर सवाल उठाए थे। वहीं चंपत राय और गोपाल राव को लेकर भी लगातार चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि अब तक किसी भी स्तर पर इनकी भूमिका को लेकर कोई अंतिम और सार्वजनिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

इसी तरह बैंक कर्मचारियों की जिम्मेदारी को लेकर भी कई सवाल उठे, लेकिन अब तक किसी बैंक अधिकारी या कर्मचारी को आरोपी नहीं बनाया गया है।

कई कड़ियां अब भी जांच से बाहर

मामले में सीसीटीवी निगरानी करने वाले कर्मचारियों, चोरी के आभूषण खरीदने वालों और कथित तौर पर चोरी की रकम का इस्तेमाल करने वाले लोगों की भूमिका भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। जांच के दौरान कुछ प्रभावशाली लोगों के नामों की चर्चा जरूर हुई, लेकिन पुलिस ने अब तक किसी नई गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है।

नई SIT की अगुवाई आईजी लखनऊ रेंज किरण एस करेंगी। टीम में डीआईजी सोमेन वर्मा और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर भी शामिल हैं, जो पहले से इस मामले की जांच प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं।

नई SIT के सामने सात बड़े सवाल

1. आखिर कुल कितनी रकम और आभूषण गायब हुए?

मामले का खुलासा गणना कक्ष के पास से लगभग 2.25 लाख रुपये मिलने के बाद हुआ था। इसके बाद चोरी की रकम को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए, लेकिन अब तक किसी एजेंसी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कुल कितनी नकदी और कितने आभूषण चोरी हुए।

2. क्या पूरा नेटवर्क केवल टिन्नू चला रहा था?

जांच में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को कथित मास्टरमाइंड बताया गया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इतना बड़ा नेटवर्क वह अकेले चला सकता था? उसे हुंडियों की चाबियां किसने सौंपीं और कर्मचारियों की नियुक्तियों में किसकी भूमिका थी, यह अब भी जांच का विषय है।

3. बैंक कर्मचारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं हुई?

जांच में सुरक्षा मानकों के पालन में कई कमियां सामने आने की बात कही गई। इसके बावजूद किसी बैंक कर्मचारी पर अब तक कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में उनकी जवाबदेही अब भी सवालों के घेरे में है।

4. CCTV निगरानी के बावजूद चोरी कैसे होती रही?

गणना कक्ष में कैमरे लगे होने के बावजूद चोरी लंबे समय तक जारी रहने की बात सामने आई। ऐसे में फुटेज की निगरानी कौन कर रहा था और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इसका जवाब अब भी नहीं मिला है।

5. चंपत राय, अनिल मिश्र और गोपाल राव की भूमिका क्या थी?

इन तीनों नामों को लेकर सार्वजनिक चर्चा लगातार होती रही है, लेकिन जांच एजेंसियों ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया कि मामला प्रशासनिक लापरवाही का है या किसी प्रकार की प्रत्यक्ष संलिप्तता की जांच की जा रही है।

6. फर्जी चंदा रसीदों का मामला क्या था?

जांच के दौरान कथित फर्जी दान रसीदों की भी चर्चा सामने आई थी। हालांकि अब तक इस विषय पर कोई आधिकारिक और स्पष्ट रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

7. चोरी का पैसा आखिर कहां-कहां पहुंचा?

सबसे अहम सवाल यह है कि चोरी की गई धनराशि किन लोगों तक पहुंची और उसका उपयोग कहां हुआ। क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं, इस पर अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

सुप्रीम कोर्ट की नजर नई जांच पर

सरकार आज Supreme Court में नई SIT के गठन और जांच की वर्तमान स्थिति से जुड़ी रिपोर्ट पेश करेगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि नई जांच टीम इन अनसुलझे सवालों का जवाब तलाश पाती है या नहीं और क्या जांच में कोई नए तथ्य सामने आते हैं।