Rahul Gandhi and Tejashwi Yadav's claims created a political storm, but the truth turned out to be something else?
शनिवार का दिन देश की राजनीति में सिर्फ एक सवाल के इर्द-गिर्द घूमता रहा—क्या विपक्षी नेताओं के दावे सच्चे थे या सिर्फ Political Distraction?
जहां Rahul Gandhi ने दिवंगत वित्त मंत्री Arun Jaitley पर उन्हें धमकाने का आरोप लगाया, वहीं Tejashwi Yadav ने अपने EPIC Number और Voter List को लेकर Election Commission पर गंभीर आरोप लगाए। दोनों बयानों ने मीडिया में हलचल मचा दी, लेकिन कुछ ही घंटों में दस्तावेज़ और रिकॉर्ड्स ने इन दावों की सच्चाई से पर्दा उठा दिया।
Rahul Gandhi का दावा: “Arun Jaitley को मुझे धमकाने भेजा गया था”
शनिवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के वार्षिक विधि सम्मेलन में राहुल गांधी ने एक विस्फोटक दावा करते हुए कहा:
“मुझे याद है जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा था और वे (अरुण जेटली) अब इस दुनिया में नहीं हैं, इसलिए शायद मुझे यह नहीं कहना चाहिए, लेकिन मैं कहूंगा। अरुण जेटली को मुझे धमकाने के लिए भेजा गया था। उन्होंने मुझसे कहा, ‘अगर आप सरकार का विरोध करते हुए इसी रास्ते पर चलते रहे, तो हमें आपके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।’
मैंने उनकी तरफ देखा और कहा—‘मुझे नहीं लगता कि आपको पता है कि आप किससे बात कर रहे हैं, क्योंकि हम कांग्रेस के लोग हैं, हम कायर नहीं हैं।’”
राहुल गांधी के इस बयान ने तुरंत political controversy को जन्म दे दिया। लोग सवाल पूछने लगे कि क्या वाकई अरुण जेटली उनके पास इस तरह की चेतावनी लेकर आए थे?
Rohan Jaitley का जवाब: “यह बयान असत्य और अपमानजनक है”
राहुल गांधी के आरोप पर दिवंगत अरुण जेटली के बेटे Rohan Jaitley ने X (पूर्व में Twitter) पर करारा जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट लिखा:
“राहुल गांधी का दावा है कि मेरे दिवंगत पिता अरुण जेटली ने उन्हें कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था। मैं उन्हें याद दिला दूं कि मेरे पिता का देहांत 2019 में हुआ था। कृषि कानून 2020 में पेश किए गए थे। इससे स्पष्ट होता है कि उनका बयान तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह से गलत और भ्रामक है।”
इसके अलावा उन्होंने मीडिया को दिए अपने बयान में कहा:
“इस मुद्दे पर दो बातें बहुत महत्वपूर्ण हैं। पहली—राहुल गांधी जिस विषय पर बात कर रहे हैं, वह मेरे पिता के निधन के बाद का है। दूसरी—धमकाने जैसी कोई बात मेरे पिता के स्वभाव में कभी रही ही नहीं। वे विपक्ष का भी सम्मान करते थे। उनके बारे में ऐसा कहना पूरी तरह असत्य है।”
“इससे पहले भी राहुल गांधी ने श्री मनोहर पर्रिकर जी के बारे में इसी प्रकार की असत्य टिप्पणी की थी। वे एक संवैधानिक पद पर हैं, उन्हें सोच-समझकर और जिम्मेदारी से बोलना चाहिए। वे बार-बार झूठ बोलते हैं और उन्हें इस बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।”
BJP का रुख: “Rahul Gandhi Timeline से भी अनजान हैं”
BJP IT Cell प्रमुख अमित मालवीय ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने X पर कहा:
“राहुल गांधी का दावा है कि अरुण जेटली ने 2020 के कृषि कानूनों के प्रति उनके विरोध को दबाने के लिए उनसे संपर्क किया था। लेकिन हकीकत यह है कि अरुण जेटली जी का निधन 24 अगस्त 2019 को हो गया था। कृषि विधेयकों का मसौदा 3 जून 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष लाया गया और यह कानून सितंबर 2020 में लागू किए गए।”
“कोई भी बातचीत या विरोध, इन घटनाओं के बाद ही शुरू हुआ। ऐसे में यह कहना कि अरुण जेटली ने राहुल से संपर्क किया था, पूरी तरह factually incorrect और historically inaccurate है। नेताओं को तथ्यों पर टिके रहना चाहिए और convenient narrative के लिए timeline से नहीं खेलना चाहिए।”
अब बात तेजस्वी यादव की: “मेरा नाम Voter List से गायब है”
बिहार के पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि Voter List Revision (SIR) के बाद जारी Draft Roll में उनका नाम मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा:
“मैंने EPIC नंबर डालकर Voter List में अपना नाम ढूंढने की कोशिश की, लेकिन नहीं मिला। इसका मतलब ये है कि मैं अब मतदाता नहीं हूं। मैं चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो गया हूं, और शायद नागरिक भी नहीं रहा। मुझे लगता है कि अब मुझे मेरे ही घर में रहने का हक नहीं है।”
तेजस्वी ने यह भी आरोप लगाया कि यह सब Election Commission की साजिश है और अगर उनके साथ ऐसा हो सकता है तो किसी भी आम नागरिक के साथ भी हो सकता है।
Patna DM का जवाब: “नाम सूची में है, Booth वही है, EPIC नंबर वही है”
तेजस्वी यादव के दावे पर पटना जिला प्रशासन ने साक्ष्यों के साथ जवाब दिया। जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने कहा:
“हमने जांच की और पाया कि तेजस्वी यादव का नाम सूची में स्पष्ट रूप से मौजूद है। उनका मतदान केंद्र वही है—पशु चिकित्सा महाविद्यालय का पुस्तकालय। हां, Booth Number में बदलाव किया गया है जो नियमित प्रक्रिया के तहत होता है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया:
“वो जो EPIC नंबर दिखा रहे हैं, उसकी भी जांच की जाएगी। हो सकता है वह डुप्लीकेट हो, लेकिन हम पुष्टि नहीं कर सकते जब तक हमें वह नंबर नहीं दिया जाए। उनके द्वारा जो EPIC नंबर 2020 के चुनाव में दिया गया था, वही Draft Roll में दर्ज है।”
Samrat Choudhary का कटाक्ष: “नाम लालू जी के साथ है, झूठ बंद कीजिए”
बिहार के डिप्टी सीएम Samrat Choudhary ने तेजस्वी यादव को X पर टैग करते हुए लिखा:
“आपका नाम आपके पिता, आदरणीय लालू प्रसाद यादव जी के नाम के बिल्कुल साथ है। कृपया झूठे दावों की दुकान बंद कीजिए और जनता को गुमराह करना बंद करें।”
Tejashwi का दूसरा आरोप: “मेरा EPIC Number बदल दिया गया”
तेजस्वी यादव ने एक और गंभीर आरोप लगाया कि उनका Voter ID Number (EPIC Number) बदल दिया गया है। उन्होंने कहा:
“मेरा EPIC नंबर बदल दिया गया है। यह सीधा चुनाव आयोग की साजिश का हिस्सा है। अगर मेरे साथ ऐसा हो सकता है, तो बिहार के किसी भी आम नागरिक के साथ हो सकता है। हम चुनाव आयोग से यह जानना चाहते हैं कि मेरी तरह कितने लोगों का EPIC नंबर बदला गया है? इसका पूरा आंकड़ा सार्वजनिक किया जाए।”
क्या यह सिर्फ सियासी रणनीति थी?
Rahul Gandhi और Tejashwi Yadav के दावों ने मीडिया का ध्यान जरूर खींचा, लेकिन कुछ ही घंटों में इन बयानों की विश्वसनीयता Fact Checks और Official Records से कमजोर पड़ गई।
चाहे बात हो Arun Jaitley का नाम लेकर दिया गया धमकी वाला बयान, या फिर Voter List में नाम गायब होने का आरोप—दोनों ही मामलों में दस्तावेज़ी सबूतों ने विपक्ष के इन नेताओं को credibility crisis की स्थिति में ला दिया।