PoK में 17वें दिन भी जारी विरोध प्रदर्शन, सरकार पर Food Supply रोकने और कर्मचारियों को बर्खास्त करने के आरोप

Pakistan Occupied Kashmir (PoK) में इस्लामाबाद सरकार के खिलाफ चल रहा जन आंदोलन लगातार 17वें दिन भी जारी है। Awami Action Committee के नेतृत्व में चल रहे इस विरोध प्रदर्शन ने अब व्यापक जनआंदोलन का रूप ले लिया है। प्रदर्शनकारी पाकिस्तान सरकार पर आंदोलन को दबाने के लिए कठोर और अमानवीय कदम उठाने के आरोप लगा रहे हैं।

Food Supply रोकने का आरोप

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि Shahbaz Sharif Government के निर्देश पर प्रशासन ने पाकिस्तान से PoK जाने वाले प्रमुख मार्गों पर खाद्यान्न और जरूरी सामान लेकर आने वाले ट्रकों को रोकना शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि आवश्यक वस्तुओं की कृत्रिम कमी पैदा कर लोगों पर आंदोलन खत्म करने का दबाव बनाया जा रहा है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और प्रशासन ने इस संबंध में सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है।

128 सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी

आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोप में अब तक 128 सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। इसके अलावा कई कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है।

प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को आंदोलन से दूर रहने की चेतावनी दी जा रही है और प्रदर्शन में शामिल होने पर उनकी पेंशन रोकने की धमकी दी जा रही है।

Protest के दौरान बढ़ा तनाव

PoK में जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। स्थानीय संगठनों का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों व कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं।

वहीं, प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ की जा रही है जो कानून-व्यवस्था भंग करने या गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं।

PoK Crisis पर बनी हुई अंतरराष्ट्रीय नजर

PoK में जारी यह आंदोलन पाकिस्तान के लिए एक बड़ी आंतरिक चुनौती बनता जा रहा है। लगातार जारी PoK Protest, प्रशासनिक कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के बीच क्षेत्र की स्थिति पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के रुख पर इस पूरे घटनाक्रम की दिशा निर्भर करेगी।