भारत-ईरान के बीच Energy Cooperation को नई गति, BRICS Meeting में Oil & Gas Sector पर हुई अहम चर्चा

नई दिल्ली में आयोजित BRICS Energy Ministers Meeting के दौरान भारत और ईरान के बीच ऊर्जा सहयोग (Energy Cooperation) को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हुई। इस बैठक में दोनों देशों ने Oil & Gas Sector, द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) और रणनीतिक परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने के विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की।

भारत के Petroleum and Natural Gas Minister Hardeep Singh Puri ने ईरान के Oil Minister Mohsen Paknejad से मुलाकात कर ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया। दोनों नेताओं ने भविष्य में सहयोग बढ़ाने और नई संभावनाओं की तलाश पर सहमति जताई।

Energy Partnership को मजबूत करने पर जोर

बैठक के दौरान दोनों देशों ने तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। ईरान ने भारत को भरोसा दिलाया कि वह आर्थिक और ऊर्जा संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रिश्ते रहे हैं और अब उन्हें आधुनिक आर्थिक सहयोग में बदलने का समय है।

Chabahar Port और Strategic Projects पर भी चर्चा

बैठक में Chabahar Port सहित अन्य रणनीतिक परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने इस बंदरगाह को क्षेत्रीय व्यापार और Connectivity के लिहाज से महत्वपूर्ण बताते हुए इसके बेहतर उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि Chabahar Port भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच का एक अहम रणनीतिक माध्यम है।

2019 के बाद क्यों रुका था Iran Oil Import?

भारत कभी ईरान से कच्चे तेल (Crude Oil) का प्रमुख आयातक था। एक समय भारत के कुल Crude Oil Import में ईरानी तेल की हिस्सेदारी लगभग 11.5 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।

हालांकि, अमेरिका द्वारा ईरान पर दोबारा लगाए गए प्रतिबंधों (US Sanctions) के बाद भारत ने मई 2019 में ईरान से Crude Oil Import रोक दिया। इसके बाद भारत ने अपनी जरूरतों के लिए मध्य पूर्व के अन्य देशों, अमेरिका और दूसरे वैश्विक स्रोतों से तेल खरीदना शुरू कर दिया।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 में भारत प्रतिदिन लगभग 5.18 लाख बैरल ईरानी तेल आयात करता था, जबकि 2019 में यह घटकर करीब 2.68 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। इसके बाद आयात पूरी तरह बंद हो गया।

Energy Security पर भारत का स्पष्ट रुख

हाल के दिनों में भारत सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उसकी Energy Policy पूरी तरह राष्ट्रीय हित (National Interest) पर आधारित है। सरकार का कहना है कि देश की प्राथमिकता 140 करोड़ से अधिक नागरिकों के लिए किफायती और सुरक्षित ऊर्जा उपलब्ध कराना है।

भारत लगातार अपने Energy Sources में Diversification पर काम कर रहा है ताकि किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता न रहे।

भविष्य में बढ़ सकते हैं सहयोग के अवसर

हालिया अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों के बीच भारत और ईरान की यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो भविष्य में दोनों देशों के बीच Energy Cooperation, Oil Trade, Gas Sector, Infrastructure Projects और Strategic Investment के क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर सामने आ सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ईरान के बीच मजबूत ऊर्जा साझेदारी न केवल दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूती दे सकती है, बल्कि क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.