One Nation, One Election: पूर्व CJI चंद्रचूड़ की चेतावनी—“छोटे दल होंगे हाशिए पर, बराबरी ज़रूरी”

One Nation One Election Debate: भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एकसाथ (Simultaneous Elections) कराने के प्रस्ताव को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे “cost-saving and governance-efficient model” बता रहे हैं, वहीं पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) धनंजय वाई. चंद्रचूड़ ने इसके संभावित खतरे गिनाए हैं।

उनका स्पष्ट कहना है—इससे क्षेत्रीय और छोटे दलों की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में हिस्सेदारी असमान हो सकती है।

संवैधानिक चिंता: संसाधन संपन्न दलों को मिलेगा फायदा

पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने Joint Parliamentary Committee (JPC) को भेजे अपने लिखित सुझावों में कहा कि एकसाथ चुनाव कराने से national parties को बढ़त मिलेगी, जबकि छोटे व क्षेत्रीय दल हाशिए पर चले जाएंगे।

उन्होंने चेतावनी दी—

“One Nation One Election मॉडल लोकतंत्र में बराबरी के उसूल के खिलाफ जा सकता है। सभी दलों को समान अवसर मिलना चाहिए, वर्ना लोकतांत्रिक संरचना असंतुलित हो जाएगी।”

चुनावी खर्च: बड़ी पार्टियों को मिलती है बढ़त

पूर्व CJI ने election funding rules की खामियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा:

  • उम्मीदवारों पर तो खर्च की सीमा है,

  • लेकिन राजनीतिक दल कितना खर्च करते हैं, इस पर कोई सख्त नियंत्रण नहीं है।

इससे “Money Power in Politics” को बढ़ावा मिलता है, और संसाधनहीन दल पिछड़ जाते हैं।

बेसिक स्ट्रक्चर और अस्थायी सरकार का संकट

उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी राज्य में कार्यकाल समाप्त होने से पहले विधानसभा भंग हो जाती है, तो भारतीय कानून By-Election (उपचुनाव) का प्रावधान देता है ताकि मतदाताओं का प्रतिनिधित्व बना रहे।

चेतावनी:

“अगर अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) पर समय-सीमा तय कर दी गई, तो अल्पमत वाली सरकारें भी सत्ता में बनी रह सकती हैं। यह लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है।”

संविधान संशोधन: 2034 में हो सकते हैं पहले एकसाथ चुनाव

  • प्रस्तावित 129वें संविधान संशोधन विधेयक में Article 82A जोड़ने की बात कही गई है।

  • इससे लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एकसाथ कराए जा सकेंगे।

  • बदलाव 2029 में लागू होंगे और 2034 में देशभर में पहला One Nation One Election आयोजित किया जाएगा।

11 जुलाई को अहम बैठक, पूर्व CJIs होंगे शामिल

11 जुलाई को JPC की अगली बैठक प्रस्तावित है, जिसमें पूर्व CJIs J.S. Khehar और D.Y. Chandrachud, साथ ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली और ईएमएस नचियप्पन भी अपनी राय रखेंगे।

इतिहास क्या कहता है?

1952 से 1967 तक भारत में एकसाथ चुनाव होते थे। लेकिन राज्यों और केंद्र की सरकारों के कार्यकाल टूटने के कारण यह सिलसिला थम गया। अब दोबारा इसे लागू करने की कोशिश की जा रही है, जिसके लिए बड़ी लॉजिस्टिक तैयारी और राजनीतिक सहमति की जरूरत होगी।