Munsyari Villages in Crisis: नदी में बहा पुल, ट्रॉली भी बंद — 3,000 लोग फंसे मुश्किल में

Pithoragarh News (Uttarakhand): सीमांत ब्लॉक मुनस्यारी (Munsyari) के छह गांव — रिंगू, गैला, राप्ती, वल्थी, मदकोट और चुलकोट — के करीब तीन हजार से अधिक ग्रामीण पिछले चार महीने से भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
आपदा के दौरान मंदाकिनी नदी (Mandakini River) पर बना अस्थायी पुल और पैदल रास्ता बह जाने के बाद से ग्रामीणों की आवाजाही पूरी तरह बाधित है। आज भी न तो पुल की मरम्मत हुई है और न ही कोई वैकल्पिक मार्ग बनाया गया है।

लटकी ट्रॉली, टूटे रास्ते — ग्रामीणों का सफर बना जानलेवा

ग्रामीणों के मुताबिक नदी पार करने के लिए लगाई गई temporary trolley भी पिछले चार महीने से हवा में लटकी है। ऐसे में लोगों को अब खतरनाक बोल्डरों और फिसलन भरे पहाड़ी रास्तों से गुजरना पड़ रहा है।
इस स्थिति ने ration, medicines और essential supplies पहुंचाने को लगभग असंभव बना दिया है। कई बार महिलाएं और बुजुर्ग रास्ते में फिसलकर घायल हो चुके हैं, लेकिन no road connectivity के कारण लोग मजबूर हैं।

“सरकार को कई बार लिखा, अब आंदोलन ही विकल्प” — भावना दानू

मदकोट क्षेत्र की जिला पंचायत सदस्य भावना दानू (Bhavana Danu) ने बताया कि प्रशासन और राज्य सरकार को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं, समाधान नहीं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द पुल और ट्रॉली की मरम्मत (bridge repair) शुरू नहीं हुई तो ग्रामीणों को protest या agitation का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
भावना दानू ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिलाधिकारी पिथौरागढ़ से स्थायी पुल निर्माण और वैकल्पिक मार्ग की मांग की है।

DM का आश्वासन – जल्द बहाल होगी आवाजाही

जिलाधिकारी पिथौरागढ़ आशीष कुमार भटगांई (DM Ashish Kumar Bhatgaini) ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है और संबंधित विभाग को तुरंत repair work शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि तब तक के लिए temporary route और trolley service को दोबारा चालू करने की व्यवस्था की जा रही है।
डीएम ने आश्वासन दिया कि जल्द ही transport connectivity बहाल कर दी जाएगी ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।

Ground Reality: Disaster के बाद भी नहीं मिली राहत

चार महीने बीत जाने के बाद भी basic connectivity बहाल न होना मुनस्यारी जैसे सीमांत क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
ग्रामीणों की यह समस्या सिर्फ एक पुल की नहीं, बल्कि mountain infrastructure और disaster management की कमियों को उजागर करती है।
सरकार और प्रशासन के त्वरित कदम ही इन इलाकों को फिर से जोड़ सकते हैं।