Is the TMC's political address in Delhi about to change? Turmoil caused by internal infighting.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी वामपंथ की सबसे बड़ी विरोधी रहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) को रोकने के लिए Left Parties के साथ आने के संकेत दे रही हैं। विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो का बदला हुआ रुख राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
ममता बनर्जी ने विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा है कि BJP के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सभी गैर-भाजपाई ताकतों को साथ आना होगा। खास बात यह है कि उन्होंने वाम दलों और कट्टर वामपंथी विचारधारा वाले समूहों का भी जिक्र किया, जिसने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
Left विरोध से शुरू हुई थी Mamata Banerjee की राजनीति
ममता बनर्जी की राजनीतिक पहचान ही वामपंथ के खिलाफ संघर्ष से बनी थी। 1970 और 1980 के दशक में जब पश्चिम बंगाल में Left Front का दबदबा था, तब ममता एक आक्रामक युवा नेता के रूप में उभरी थीं। उन्होंने कांग्रेस के मंच से वाम सरकार के खिलाफ लगातार आंदोलन किए।
इसके बाद Singur और Nandigram आंदोलन ने उन्हें राज्य की सबसे बड़ी जननेता बना दिया। Tata Nano Project के खिलाफ भूमि अधिग्रहण आंदोलन और नंदीग्राम हिंसा के बाद ममता ने “मां, माटी, मानुष” का नारा दिया, जिसने बंगाल की राजनीति की दिशा बदल दी।
34 साल का Left Rule खत्म कर बनीं CM
साल 2011 का विधानसभा चुनाव बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा Turning Point माना जाता है। ममता बनर्जी ने 34 साल पुरानी वाम सरकार को सत्ता से बाहर कर इतिहास रच दिया। उस समय उन्होंने साफ कहा था कि बंगाल से वामपंथ का पूरी तरह सफाया किया जाएगा।
Buddhadeb Bhattacharjee की हार और Writers’ Building से लाल झंडे का हटना भारतीय राजनीति की ऐतिहासिक घटनाओं में गिना गया। लेकिन अब वही ममता बनर्जी BJP के खिलाफ Left Support की जरूरत महसूस कर रही हैं।
BJP के बढ़ते प्रभाव ने बदली रणनीति
पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल की राजनीति तेजी से बदली है। Left Parties जहां लगातार कमजोर हुईं, वहीं BJP राज्य में मुख्य विपक्षी ताकत बनकर उभरी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TMC को अब यह एहसास हो रहा है कि विपक्षी वोटों का बंटवारा BJP को फायदा पहुंचा रहा है। इसी वजह से ममता बनर्जी अब Opposition Unity पर जोर दे रही हैं। उन्होंने कहा कि देश और लोकतंत्र को बचाने के लिए सभी सेक्युलर और गैर-भाजपाई दलों को एक मंच पर आना होगा।
जमीनी स्तर पर आसान नहीं होगा गठबंधन
हालांकि राजनीतिक स्तर पर गठबंधन की चर्चा हो रही है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। बंगाल के कई इलाकों में TMC और Left कार्यकर्ताओं के बीच लंबे समय से हिंसक संघर्ष का इतिहास रहा है। ऐसे में दोनों दलों के कैडर का एक साथ आना आसान नहीं माना जा रहा।
CPM समेत कई वाम दल पहले भी ममता बनर्जी पर BJP को बंगाल में मजबूत करने का आरोप लगाते रहे हैं। वहीं TMC समर्थकों के लिए भी Left विरोध लंबे समय से राजनीतिक पहचान का हिस्सा रहा है।
Bengal Politics में बन सकता है नया समीकरण
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि BJP के “Hindutva Politics” और बढ़ते जनाधार को देखते हुए ममता बनर्जी अब एक बड़े Anti-BJP Alliance की तैयारी कर रही हैं। यदि TMC और Left के बीच किसी तरह की समझ बनती है तो यह बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा और सबसे विरोधाभासी गठबंधन साबित हो सकता है। जिस वामपंथ को ममता बनर्जी ने कभी अपना सबसे बड़ा राजनीतिक दुश्मन बताया था, अब वही उनके लिए संभावित सहयोगी बनता नजर आ रहा है। आने वाले समय में West Bengal Politics किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरे देश की नजर रहेगी।