Mainpuri News: ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ नारा न लगाने पर बच्चों और महिला से मारपीट? वायरल वीडियो से मचा बवाल

Mainpuri Viral News Today: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न सिर्फ स्थानीय लोगों को, बल्कि सोशल मीडिया पर भी भारी आक्रोश फैला दिया है। आरोप है कि पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा न लगाने पर बच्चों को पीटा गया, महिला को घूंसा मारकर बेहोश किया गया और उसके भाई को भी बेरहमी से पीटकर अस्पताल पहुंचाया गया।

हालांकि, पुलिस ने Pakistan Zindabad Slogan की पुष्टि नहीं की है और इसे बच्चों के आपसी झगड़े से जुड़ा मामला बताया है। बावजूद इसके, घटना का वीडियो वायरल हो चुका है और राजनीतिक हलकों में भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है।

घटना क्या है?

घटना मैनपुरी जिले के बरनाहल थाना क्षेत्र के मोहनपुर गांव की है। गांव की महिला मीना देवी ने पुलिस अधीक्षक (SP) को दी गई शिकायत में बताया कि गांव के मुस्लिम युवकों ने उसके बच्चों से जबरन पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगवाने की कोशिश की। बच्चों ने विरोध किया तो उनके साथ मारपीट की गई।

बच्चों की शिकायत के बाद मीना देवी ने विरोध जताया, तो आरोप है कि आलम नामक युवक ने उसके मुंह पर घूंसा मारकर उसे बेहोश कर दिया।

भाई को बंधक बनाकर पीटा

16 मई को जब मीना देवी का भाई रानू (निवासी – जगन्नाथपुर, इटावा) उसे देखने आया, तो आरोपियों ने उसे जबरन घर के अंदर खींचकर बंधक बना लिया और बुरी तरह पीटा। उसकी हालत गंभीर होने पर उसे सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।

वायरल वीडियो और भाजपा की एंट्री

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है जिसमें मारपीट और गाली-गलौज की झलक दिखाई दे रही है। पीड़िता ने भाजपा जिलाध्यक्ष ममता राजपूत से मुलाकात कर न्याय की मांग की है। इस प्रकरण ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है और इसे Law and Order in UP से जोड़कर देखा जा रहा है।

पुलिस का क्या कहना है?

थाना प्रभारी संतोष कुमार का बयान सामने आया है कि:

“पाकिस्तान जिंदाबाद जैसे नारे की कोई पुष्टि नहीं हुई है। यह बच्चों के बीच मामूली विवाद था जिसे तूल दिया जा रहा है।”

पुलिस ने आरोपी अब्दुल रहमान को शांतिभंग की धारा में गिरफ्तार किया है जबकि मुख्य आरोपी आलम अभी फरार है।

विवाद के पीछे असल सच क्या?

घटना ने जहां समाज में धार्मिक तनाव की आशंका बढ़ा दी है, वहीं पुलिस इसे सामान्य ग्रामीण विवाद बता रही है। ऐसे मामलों में वायरल वीडियो और भावनात्मक बयानों के कारण सच्चाई तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

इसलिए जरूरी है कि:

  • पुलिस निष्पक्ष जांच करे

  • वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि हो

  • किसी भी धर्म या समुदाय को बिना तथ्यों के दोषी न ठहराया जाए

नारे की राजनीति या ग्रामीण रंजिश?

इस घटना को लेकर दो पक्ष सामने आ रहे हैं — पीड़ित परिवार का गंभीर आरोप और पुलिस की सतर्क प्रतिक्रिया। अब सवाल यह है कि क्या यह वाकई Religious Slogan Controversy है या फिर स्थानीय दुश्मनी का नतीजा?

जवाब न्यायिक जांच से ही मिलेगा।