Maharajganj: Innocent children performed the last rites of their father by placing his dead body on a cart
महाराजगंज (Maharajganj) जिले के नौतनवा कस्बे में नेपाल सीमा के पास रहने वाले तीन मासूम बच्चों की कहानी पूरे यूपी में चर्चा का विषय बन गई है। उनके पिता लव कुमार पटवा की लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई, लेकिन बच्चों के पास अंतिम संस्कार कराने के लिए कोई मदद नहीं थी।
रिश्तेदार और पड़ोसियों का अनदेखा
बच्चों ने सबसे पहले रिश्तेदारों का इंतजार किया, लेकिन कोई नहीं आया। इसके बाद उन्होंने पास-पड़ोस वालों से मदद मांगी, लेकिन किसी ने भी आगे बढ़कर सहायता नहीं की। आर्थिक तंगी और मजबूरी के चलते बच्चे अपने पिता का शव खुद ठेले पर रखकर श्मशान घाट (Cremation) की ओर निकल पड़े।
मासूमों की हिम्मत और संघर्ष
बच्चे अपने पिता की मौत और अपनी बेबसी के गम में रोते रहे। उन्होंने पिता की लाश को ठेले पर रखकर छपवा चौराहे तक पहुँचाया, लेकिन अंतिम संस्कार का इंतजाम करना उनके लिए असंभव हो गया।
जनप्रतिनिधियों ने पहुंचाई मदद
इस दौरान बिस्मिल नगर के सभासद राशिद कुरैशी और राहुल नगर के सभासद वारिस कुरैशी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बच्चों को ढांढस बंधाया और पिता के अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियों का इंतजाम किया। जनप्रतिनिधियों की मदद से बच्चे अपने पिता को श्मशान घाट पर अंतिम विदाई दे सके।
परिवार की स्थिति
मृतक लव कुमार पटवा के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। बच्चों की उम्र क्रमशः 14 साल, 10 साल और सबसे छोटी बेटी है। पहले ही माता का निधन हो चुका था। पिता की मौत के बाद उनके पास न तो अंतिम संस्कार के लिए पैसा था और न ही कोई सहारा।