Left IAS after not getting work, now demand to separate from association creates stir
UP News में एक बार फिर IAS officer Rinku Singh चर्चा में हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से इस्तीफा देने के बाद अब उन्होंने एक और बड़ा कदम उठाया है। रिंकू सिंह ने IAS Association को पत्र लिखकर यह जानना चाहा है कि सेवा छोड़ने की उनकी प्रक्रिया विचाराधीन रहने के दौरान उन्हें एसोसिएशन से औपचारिक रूप से बाहर होने के लिए क्या प्रक्रिया अपनानी होगी।
उनका यह कदम सिर्फ एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे bureaucratic system और institutional support पर उठे गंभीर सवालों के रूप में भी देखा जा रहा है।
IAS Association को लिखा नया पत्र
इस्तीफा देने के बाद रिंकू सिंह ने IAS Association को भेजे अपने पत्र में कहा है कि उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा से त्यागपत्र देने और अपने पुराने विभाग समाज कल्याण विभाग में पूर्व पद पर वापस कार्यभार संभालने की इच्छा जाहिर की है।
इसी संदर्भ में उन्होंने एसोसिएशन से मार्गदर्शन मांगा है कि जब तक उनका त्यागपत्र विचाराधीन है, तब तक Association से निष्कासन या बाहर होने की औपचारिक प्रक्रिया क्या होगी।
यह पत्र उनके इस्तीफे के बाद सामने आया नया और अहम कदम माना जा रहा है।
एसोसिएशन पर लगाए गंभीर आरोप
रिंकू सिंह ने अपने पत्र में सिर्फ प्रक्रिया संबंधी जानकारी ही नहीं मांगी, बल्कि IAS Association के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि एसोसिएशन ने उनके जैसे जूनियर अधिकारियों की moral concerns, duty-related issues और professional grievances के प्रति लगातार उदासीनता दिखाई है।
उनका कहना है कि यह रवैया सिर्फ व्यक्तिगत स्तर पर निराशाजनक नहीं है, बल्कि इससे institutional conscience कमजोर होता है और सेवा की constitutional morality भी प्रभावित होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति का असर उन अधिकारियों के मनोबल पर भी पड़ सकता है, जो आने वाले समय में इस सेवा में शामिल होने वाले हैं।
2023 बैच के IAS अधिकारी हैं रिंकू सिंह
रिंकू सिंह UP cadre के 2023 batch IAS officer हैं। वे उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से ताल्लुक रखते हैं और उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि BTech और MA रही है।
फिलहाल वे राजस्व परिषद से संबद्ध थे, लेकिन उनका आरोप है कि उन्हें लंबे समय से कोई सार्थक जिम्मेदारी या कार्य आवंटित नहीं किया गया। इसी वजह से उन्होंने अंततः IAS resignation का रास्ता चुना।
राष्ट्रपति को भेजा इस्तीफा, कई वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी कॉपी
रिंकू सिंह ने अपना इस्तीफा सीधे राष्ट्रपति को भेजा है। इसके साथ ही इसकी प्रतियां मुख्य सचिव, राजस्व परिषद के अध्यक्ष और प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक को भी भेजी गई हैं।
यह दिखाता है कि उनका फैसला अचानक लिया गया कदम नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही प्रशासनिक असंतुष्टि और कार्यहीनता की स्थिति का परिणाम है।
समाज कल्याण विभाग में वापसी की जताई इच्छा
रिंकू सिंह ने अपने इस्तीफे में यह भी स्पष्ट किया है कि वे अपनी पुरानी सेवा में वापस जाना चाहते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि उन्हें फिर से समाज कल्याण विभाग में भेजा जाए, जहां वे पहले समाज कल्याण अधिकारी के रूप में कार्य कर चुके हैं।
यानी उनका उद्देश्य पूरी तरह सरकारी सेवा छोड़ना नहीं, बल्कि ऐसी भूमिका में लौटना है जहां वे वास्तव में काम कर सकें और अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।
“बिना काम वेतन लेना ठीक नहीं” — रिंकू सिंह
रिंकू सिंह ने अपने इस्तीफे को लेकर जो सबसे महत्वपूर्ण बात कही, वह यह है कि उन्हें बिना काम के वेतन लेना स्वीकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस होता है कि अगर किसी अधिकारी को जिम्मेदारी ही न दी जाए और वह सिर्फ वेतन लेता रहे, तो यह न सिर्फ व्यक्तिगत रूप से असहज स्थिति है, बल्कि यह public service ethics के भी खिलाफ है।
उनका यह बयान सोशल मीडिया और प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा में है।
पहले भी लिख चुके थे पत्र
जानकारी के मुताबिक, रिंकू सिंह ने इससे पहले भी 29 सितंबर 2025 और 27 दिसंबर 2025 को संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर इस बात पर आपत्ति जताई थी कि उन्हें बिना कार्य के वेतन दिया जा रहा है।
उन्होंने इन पत्रों में स्पष्ट रूप से कहा था कि उन्हें या तो उचित कार्यभार दिया जाए या फिर इस स्थिति का समाधान निकाला जाए। लेकिन उनके अनुसार, बार-बार आग्रह के बावजूद उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई।
अधीनस्थों के सहयोग न मिलने का भी आरोप
रिंकू सिंह ने यह भी कहा है कि सिर्फ काम न मिलने की समस्या ही नहीं थी, बल्कि जिन लोगों के साथ उन्हें काम करना था, वहां से भी उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा था।
यह संकेत देता है कि मामला सिर्फ posting issue या administrative delay तक सीमित नहीं था, बल्कि संभवतः systemic isolation और functional disconnect जैसी समस्याएं भी इसमें शामिल थीं।
प्रशासनिक व्यवस्था पर खड़े हुए बड़े सवाल
रिंकू सिंह का मामला अब सिर्फ एक अधिकारी के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गया है। यह सवाल भी उठने लगे हैं कि अगर एक IAS officer खुद को सिस्टम में underutilized, unsupported और ignored महसूस कर रहा है, तो यह प्रशासनिक ढांचे के लिए चिंता की बात है।
उनके इस्तीफे और Association को लिखे गए पत्र ने यह बहस तेज कर दी है कि क्या प्रशासनिक सेवाओं में सिर्फ पद और प्रतिष्ठा काफी है, या अधिकारियों को प्रभावी काम और संस्थागत सहयोग भी मिलना चाहिए।
यह मामला क्यों बना चर्चा का विषय?
Rinku Singh IAS case इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आमतौर पर IAS जैसे प्रतिष्ठित पद से इस्तीफा देना बेहद दुर्लभ माना जाता है। उससे भी ज्यादा असामान्य यह है कि कोई अधिकारी सार्वजनिक रूप से यह कहे कि उसे काम नहीं दिया जा रहा और वह salary without work स्वीकार नहीं करना चाहता।
यह मामला आने वाले समय में civil services culture, work allocation system और bureaucratic accountability पर बड़ी बहस को जन्म दे सकता है।
IAS resignation के बाद Rinku Singh का IAS Association से भी बाहर होने का रास्ता पूछना इस पूरे मामले को और गंभीर बना देता है। यह सिर्फ एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में मौजूद कई गहरी समस्याओं की ओर इशारा करता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उनका इस्तीफा स्वीकार होगा, क्या उन्हें समाज कल्याण विभाग में वापस भेजा जाएगा, और क्या इस पूरे मामले के बाद प्रशासनिक तंत्र अपने भीतर झांकने को मजबूर होगा।