Latest study on Uttarakhand Glacier Lakes: Area increased in last 10 years, danger increased
उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों (Glacier Lakes) की संख्या और उनका क्षेत्रफल लगातार बढ़ रहा है, जिससे राज्य में natural disaster risk बढ़ रहा है। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी और दून विश्वविद्यालय (Doon University) के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक शोध में चेताया है कि पिछले 10 साल में ग्लेशियर झीलें दो प्रतिशत बढ़ गई हैं, जबकि उनका कुल क्षेत्रफल आठ प्रतिशत से अधिक बढ़ चुका है।
शोध के मुख्य तथ्य
शोधपत्र मई 2025 में प्रकाशित हुआ और इसमें Resoursesat-2 LISS-4 जैसे high-resolution satellite imagery का इस्तेमाल किया गया।
वर्ष 2013 में प्रदेश में कुल 1266 ग्लेशियर झीलें थीं, जो 2023 में बढ़कर 1290 हो गईं।
क्षेत्रफल 75.9 लाख वर्ग मीटर से बढ़कर 82.1 लाख वर्ग मीटर हो गया है।
मोरें-डैम झीलें सबसे बड़ा खतरा
वैज्ञानिकों के अनुसार, moraine-dammed lakes (बर्फ और मिट्टी से बनी झीलें) उत्तराखंड के लिए सबसे खतरनाक हैं। इनकी संख्या 10 साल में 19.2 प्रतिशत बढ़ी, जबकि क्षेत्रफल 20.4 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया। कुल झीलों का 58 प्रतिशत हिस्सा इन झीलों का है। यह संकेत देता है कि ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।
सुप्राग्लेशियल झीलों का हाल
सुप्राग्लेशियल झीलें (glacier surface lakes) पिछले 10 साल में 809 से घटकर 685 रह गई हैं।
कई छोटी झीलें आपस में मिलकर बड़ी झीलों का निर्माण कर रही हैं।
2023 में 62 प्रतिशत झीलें 800 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली थीं।
ये झीलें 4500 मीटर से ऊँचाई वाले क्षेत्रों में स्थित हैं।
जिलों और नदियों के बेसिन में स्थिति
जिलों के अनुसार ग्लेशियर झीलें:
चमोली: 571
उत्तरकाशी: 430
पिथौरागढ़: 228
टिहरी: 32
रुद्रप्रयाग: 22
बागेश्वर: 1290
10 नदियों के बेसिन में झीलों की संख्या (2013-2023):
अध्ययन में सामने आया कि चमोली और उत्तरकाशी में सबसे ज्यादा ग्लेशियर झीलें हैं। इनके अचानक फटने (glacial lake outburst) का खतरा इन जिलों में सबसे अधिक है, जिससे स्थानीय लोगों, सड़कों, पुलों और जल विद्युत परियोजनाओं पर जोखिम बना हुआ है।
उत्तराखंड बनाम हिमाचल
हिमाचल प्रदेश में ग्लेशियरों की संख्या अधिक होने के बावजूद केवल 228 सुप्राग्लेशियल झीलें हैं। उत्तराखंड में यह संख्या 685 है। तेज मानसूनी बारिश, कम अक्षांश और नीचे स्थित ग्लेशियरों के कारण यहां ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहे हैं, जिससे झीलों का आकार और संख्या बढ़ रही है।