Kerala Politics में बड़ा बदलाव, वीडी सतीशन ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

V. D. Satheesan ने केरल के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेकर राज्य की राजनीति में नए दौर की शुरुआत कर दी है। कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की बड़ी जीत के बाद सतीशन ने मुख्यमंत्री पद संभाला। इसके साथ ही राज्य में पिछले 10 वर्षों से चला आ रहा वामपंथी शासन समाप्त हो गया।

राज्यपाल Rajendra Arlekar ने उन्हें मलयालम भाषा में शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।

शपथ समारोह में दिखी कांग्रेस की ताकत

समारोह में Rahul Gandhi, Mallikarjun Kharge, Priyanka Gandhi Vadra और कांग्रेस महासचिव K. C. Venugopal शामिल हुए। इस दौरान राहुल गांधी ने सतीशन को गले लगाकर बधाई दी, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

इसके अलावा Siddaramaiah, D. K. Shivakumar, Revanth Reddy और Sukhvinder Singh Sukhu भी समारोह में मौजूद रहे।

दिलचस्प बात यह रही कि पूर्व मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan भी शपथ ग्रहण कार्यक्रम में मंच पर नजर आए।

20 सदस्यीय कैबिनेट ने भी ली शपथ

वीडी सतीशन के साथ 20 सदस्यीय मंत्रिमंडल ने भी शपथ ली। इससे पहले उन्होंने मंत्रियों की अंतिम सूची राज्यपाल को सौंप दी थी। शपथ ग्रहण के बाद विभागों का औपचारिक बंटवारा किया जाएगा।

सतीशन ने बताया कि सरकार के गठन में महिलाओं और अनुसूचित जाति समुदाय के प्रतिनिधित्व का विशेष ध्यान रखा गया है।

इन नेताओं को कैबिनेट में मिली जगह

नई Kerala Cabinet में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Ramesh Chennithala को शामिल किया गया है। इसके अलावा K. Muraleedharan, A. P. Anil Kumar और केपीसीसी अध्यक्ष Sunny Joseph को भी मंत्री बनाया गया है।

सहयोगी दलों से भी कई नेताओं को जगह मिली है। इनमें IUML नेता P. K. Kunhalikutty, आरएसपी नेता Shibu Baby John और Mons Joseph शामिल हैं।

14 नए चेहरों को मिला मौका

नई सरकार में 14 नए चेहरों को मंत्री बनाया गया है। सतीशन खुद 2001 से पारावूर सीट से विधायक रहे हैं, लेकिन पहली बार सरकार में कोई बड़ा प्रशासनिक पद संभाल रहे हैं।

पहली बार मंत्री बनने वालों में P. C. Vishnunath, Rosy M John, Bindu Krishna और T. Siddique जैसे नाम शामिल हैं।

केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव

Kerala Politics में यह बदलाव बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में लंबे समय बाद कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में लौटी है। UDF की इस जीत को दक्षिण भारत की राजनीति में कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।