नोबेल पुरस्कार चाहिए केजरीवाल को, भाजपा ने कहा- हां, भ्रष्टाचार के लिए जरूर मिलना चाहिए!

Kejriwal Nobel Prize Claim Controversy: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के हालिया बयान ने देश की सियासत में एक नया तड़का लगा दिया है। केजरीवाल ने खुद को सुशासन के लिए नोबेल पुरस्कार देने की बात कही, तो Delhi BJP ने इस पर चुटकी लेते हुए तंज कसते हुए “समर्थन” भी दे डाला — लेकिन बिलकुल अलग अंदाज़ में।

 केजरीवाल बोले- मुझे नोबेल मिलना चाहिए

केजरीवाल ने हाल ही में बयान दिया था कि,

“एलजी के रोकने के बावजूद उन्होंने दिल्ली में इतना काम किया कि उन्हें Governance और Administration के लिए Nobel Prize मिलना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि उनके दो सहयोगी मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन, जिन पर फिलहाल घोटालों के आरोप हैं और जो जेल में बंद हैं, उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए।

 BJP का पलटवार: ‘भ्रष्टाचार और अराजकता’ के लिए नोबेल

Delhi BJP अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने केजरीवाल की बातों पर तंज कसते हुए कहा:

“अगर नोबेल पुरस्कार भ्रष्टाचार, अराजकता और अकर्मण्यता के लिए भी दिया जाता, तो केजरीवाल उसमें सबसे आगे होते।”

उन्होंने कहा कि नोबेल पुरस्कार की सूची में अगर ये कैटेगरीज जोड़ी जाएं, तो केजरीवाल बेशक विजेता होंगे।

 “मानसिक संतुलन की जांच कराएं केजरीवाल” – BJP

सचदेवा ने और भी तीखे शब्दों में कहा:

“जिस व्यक्ति पर दर्जनों घोटाले हों, जिसने दिल्ली को लूटने में कोई कसर न छोड़ी हो, वो अगर नोबेल की बात करे तो यह मानसिक भ्रम जैसा लगता है।”

उन्होंने शीश महल घोटाला, एक्साइज घोटाला, PWD घोटाला, स्कूल घोटाला, पैनिक बटन घोटाला, पेंशन घोटाला, राशन घोटाला जैसे कई आरोप गिनाए।

 क्या यह एक राजनीतिक रणनीति है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केजरीवाल का “Nobel Award Statement” और BJP की “व्यंग्यात्मक सहमति” – दोनों ही 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले Narrative Building का हिस्सा हो सकते हैं।

AAP खुद को अवरोध के बावजूद काम करने वाली पार्टी बताकर सहानुभूति बटोरना चाहती है।

वहीं BJP, केजरीवाल को ‘घोटालों का चेहरा’ बताकर जनता को याद दिलाना चाहती है कि सत्ता का दुरुपयोग कैसे हुआ।