Justice Verma vs Justice Shekhar: सिब्बल ने उठाए Impeachment Process पर सवाल

राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील Kapil Sibal ने Justice Yashwant Verma के खिलाफ चल रही Impeachment Process पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सिब्बल का कहना है कि जज वर्मा के खिलाफ सबूत इतने अस्पष्ट हैं कि उन पर महाभियोग की कार्यवाही उचित नहीं लगती।

सिब्बल पहले भी कई Judicial Impeachment Cases जैसे जस्टिस सौमित्र सेन और जस्टिस रामास्वामी में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने कहा, “जांच के बिना सिर्फ जली हुई नकदी के वीडियो और अफवाहों के आधार पर कोई भी कार्रवाई करना उचित नहीं है।”

Shekhar Yadav पर कार्रवाई में देरी क्यों?

Kapil Sibal ने इंटरव्यू में पूछा कि जब Justice Shekhar Yadav के Communal Speech पर 55 सांसदों ने Impeachment Proposal पर हस्ताक्षर किए, तो उस पर 6 महीने से कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

उनका आरोप है कि सरकार और राज्यसभा के सभापति पक्षपात कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “न्यायमूर्ति यादव का भाषण सार्वजनिक है, जिसे उन्होंने कभी नकारा नहीं। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, क्या सरकार उन्हें बचा रही है?”

 Verma Case में सबूत कितने मजबूत?

Justice Yashwant Verma के खिलाफ आरोप है कि उनके सरकारी आवास के एक आउटहाउस में Burnt Currency Notes मिले, जिसकी Video Clips Viral हुईं। लेकिन सिब्बल का तर्क है:

नकदी कितनी थी, ये स्पष्ट नहीं।

नकदी किसने रखी, यह भी स्पष्ट नहीं।

Delhi Police ने जगह सील नहीं की, न कोई FIR दर्ज हुई।

जली हुई नोटों को Seize तक नहीं किया गया।

High Court CJ ने ही पहली बार Verma को वीडियो क्लिप दिखाई।

 आग, धमाका और जांच की लापरवाही?

सिब्बल के अनुसार, 14 मार्च की रात Justice Verma की बेटी ने एक धमाके की आवाज सुनी और देखा कि आउटहाउस में आग लगी है। आग बुझाने पहुंचे Fire Department और Police ने मौके से Cash Recovery या Scene Sealing जैसा कोई कदम नहीं उठाया।

Justice Verma को 17 मार्च को Chief Justice द्वारा वीडियो दिखाया गया और 20 मार्च को उनका ट्रांसफर कर दिया गया। सिब्बल ने कहा, “ये कार्रवाई ‘गलती’ नहीं बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में जल्दबाज़ी है।”

 In-house Inquiry बनाम संसद का अधिकार

सिब्बल ने यह भी स्पष्ट किया कि Supreme Court की In-House Inquiry कोई वैधानिक जांच नहीं है और Impeachment Proceedings का आधार नहीं बन सकती। उन्होंने कहा:

“महाभियोग संसद का विषय है, कोर्ट का नहीं।”

“In-house रिपोर्ट को CJI ने राष्ट्रपति को क्यों भेजा? यह सवाल है।”

“जैसा हमने जस्टिस दीपक मिश्रा केस में किया, बिना ठोस आधार के कोई प्रस्ताव नहीं आना चाहिए।”

 न्यायपालिका बनाम राजनीति?

Kapil Sibal के इन सवालों ने न्यायिक पारदर्शिता और Judicial Accountability पर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां Verma Case में जांच की प्रक्रिया संदेह के घेरे में है, वहीं दूसरी ओर Justice Shekhar Yadav पर No Action की स्थिति पर विपक्षी नेता सवाल उठा रहे हैं।

क्या इस पूरे विवाद का समाधान निष्पक्ष जांच में है या ये भी राजनीति का नया अखाड़ा बन चुका है?