Indore fire tragedy that left 8 dead: Shocking police negligence exposed
इंदौर में हुए भयानक अग्निकांड में 8 लोगों की मौत के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला सच उजागर किया है। पुलिस जिसे मासूम बच्चे तनय का शव समझ कर पोस्टमार्टम के लिए ले गई थी, वह असल में सोफे का जला हुआ फोम निकला। इस सनसनीखेज लापरवाही ने जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
एमवाय अस्पताल के डॉक्टरों की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि इस हादसे में किसी की भी मौत करंट लगने से नहीं, बल्कि जहरीले धुएं और आग की लपटों में झुलसने से हुई। तनय का केवल एक पैर ही बरामद हुआ, जबकि धड़ और सिर चार दिन बाद भी नहीं मिल पाए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सिमरन के गर्भवती होने की पुष्टि नहीं हुई, जबकि परिजन और नौकरानी उन्हें चार महीने की गर्भवती बता रहे थे।
हादसे में मृतक
इस भीषण अग्निकांड में जान गंवाने वालों में उद्योगपति मनोज पुगलिया, उनकी बहू सिमरन, विजय सेठिया, सुमन सेठिया, रुचिका उर्फ टीनू, कार्तिक, राशि और मासूम तनय शामिल थे।
जांच में सामने आया फायर का स्रोत
जांच में यह भी सामने आया कि आग की शुरुआत बिजली के खंभे से नहीं, बल्कि घर के बाहर खड़ी कार में बैटरी ब्लास्ट से हुई थी। घटना के समय सुबह करीब साढ़े तीन बजे एक राहगीर ने आग की लपटें देखी और शोर मचाया। पुलिस अब उस व्यक्ति की तलाश में जुटी है।
पुलिस की लापरवाही और फॉरेंसिक टीम की कार्रवाई
तनय के जिस हिस्से को पुलिस ने धड़ समझा, वह वास्तव में फर्नीचर का जला हुआ फोम निकला। फॉरेंसिक टीम ने मलबे में बच्चे के शेष अंगों की तलाश फिर तेज कर दी है। घटना स्थल पर SDERF टीम ने मलबे से तनय का अधजला हिस्सा बरामद किया।
परिवार की हालत और नुकसान
इस भीषण अग्निकांड में पुगलिया परिवार का घर पूरी तरह जलकर राख हो गया। परिवार के बचे सदस्य अब नए आशियाने की तलाश में हैं। मनोज पुगलिया की पत्नी सुनीता की तबीयत भी बिगड़ी और उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।