Hemant Soren's stance creates stir in Jharkhand opposition alliance politics
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन (Mahagathbandhan) के बीच बढ़ी खींचतान ने झारखंड की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। Jharkhand Mukti Morcha (JMM) ने संकेत दिया है कि वह झारखंड में गठबंधन की गंभीर समीक्षा करेगी। पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री Hemant Soren बिहार चुनाव के परिणामों के बाद गठबंधन की स्थिति और आगे की रणनीति तय करेंगे। सूत्रों के अनुसार, हेमंत सोरेन को RJD के राजनीतिक व्यवहार से नाराजगी है और वे झारखंड में सहयोगियों तथा कार्यकर्ताओं के सम्मान को ध्यान में रखते हुए नई रणनीति तैयार कर सकते हैं।
झामुमो ने जताया असंतोष
झामुमो के केंद्रीय महासचिव Vinod Kumar Pandey ने कहा कि महागठबंधन के प्रमुख दलों ने बिहार में पार्टी को अंतिम समय तक गुमराह किया। झारखंड में सहयोगियों को हमेशा सम्मान देने वाली झामुमो को बिहार में भागीदारी का उचित स्थान नहीं मिला। पार्टी ने छह सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया था, लेकिन गठबंधन की शर्तों के तहत उम्मीदवार नहीं उतारे गए।
पांडेय ने यह भी याद दिलाया कि 2019 में झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान झामुमो ने RJD को सात सीटें दीं, हालांकि RJD केवल एक सीट जीत पाया। इसके बावजूद Hemant Soren ने गठबंधन की भावना के तहत RJD कोटे से Satyenand Bhokta को पूरे पांच साल मंत्री बनाए रखा। 2024 में भी झामुमो ने यही रुख अपनाया; चार सीटें जीतने के बावजूद RJD के विधायक Sanjay Prasad Yadav को मंत्री पद दिया गया।
आगे की रणनीति और संभावित असर
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि झामुमो का यह रुख झारखंड में opposition alliance politics पर दूरगामी असर डाल सकता है। यदि बिहार चुनाव में झामुमो तटस्थ रहता है, तो महागठबंधन को नुकसान उठाना पड़ सकता है। झामुमो प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी अब भी विपक्षी एकता की समर्थन करती है, लेकिन बिहार अनुभव ने यह दिखाया कि गठबंधन की कार्यप्रणाली की समीक्षा आवश्यक है।
प्रतिवाद और चेतावनी
झामुमो नेता और सुदिव्य मंत्री Sudivya Kumar ने गिरिडीह में कहा कि यदि झामुमो को सीट नहीं देने का इरादा था, तो पहले ही स्पष्ट कर देना चाहिए था। उन्होंने कहा, “हमें जानबूझकर गुमराह किया गया। बिहार में झारखंडी हितों के साथ विश्वासघात हुआ है। झामुमो आदिवासियों की मजबूत आवाज है, इसे दबाने की कोशिश की गई, जिसका प्रतिकार होगा।”
इस बयान ने झारखंड की राजनीति में नई सुगबुगाहट पैदा कर दी है। माना जा रहा है कि Hemant Soren बिहार चुनाव के अनुभव का गहराई से विश्लेषण करने के बाद झारखंड में गठबंधन पर अपनी रणनीति तय करेंगे।