Haridwar Ganga Expressway: हरिद्वार में गंगा एक्सप्रेस-वे का विरोध तेज, किसानों ने जमीन देने से किया इनकार

Ganga Expressway Project को हरिद्वार से जोड़ने की प्रस्तावित योजना का विरोध अब तेज होने लगा है। जिले के कई गांवों के किसानों ने अपनी उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण का विरोध करते हुए साफ कर दिया है कि वे अपनी जमीन नहीं देंगे। किसानों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी खेती और आजीविका को नुकसान पहुंचाकर कोई भी परियोजना स्वीकार नहीं होगी।

किसानों ने बताई विरोध की वजह

जमालपुर कलां, सराय और आसपास के गांवों के किसानों का कहना है कि जिन जमीनों के अधिग्रहण की बात हो रही है, वे पूरी तरह सिंचित और बेहद उपजाऊ हैं। यदि इन्हें Land Acquisition के तहत लिया गया तो हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी और कई परिवार भूमिहीन होने की स्थिति में पहुंच जाएंगे।

किसानों ने सरकार से मांग की है कि Ganga Expressway के लिए ऐसा वैकल्पिक मार्ग चुना जाए, जिससे कृषि भूमि सुरक्षित रह सके और किसानों को नुकसान न उठाना पड़े।

गंगा किनारे से एक्सप्रेस-वे बनाने का सुझाव

किसानों ने परियोजना के लिए एक वैकल्पिक प्रस्ताव भी रखा है। उनका कहना है कि एक्सप्रेस-वे को Ganga River के किनारे-किनारे विकसित किया जाए। उनके अनुसार इससे गंगा तटीय क्षेत्रों का विकास होगा, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और जंगलों से आबादी की ओर हाथियों व अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही भी कम हो सकती है।

किसानों का यह भी मानना है कि नदी किनारे बेहतर सड़क बनने से बाढ़ प्रभावित इलाकों तक पहुंच आसान होगी और आपदा प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।

मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार की मांग

किसानों ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी परिस्थिति में भूमि अधिग्रहण अनिवार्य हो, तो प्रभावित परिवारों के लिए Compensation, Rehabilitation और Employment की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही सड़क निर्माण के दौरान खेतों की सिंचाई और जल निकासी व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए, ताकि भविष्य में जलभराव और फसलों के नुकसान जैसी समस्याएं पैदा न हों।

कई गांवों के किसानों ने दिखाई एकजुटता

हाल ही में जमालपुर कलां में आयोजित बैठक में जमालपुर कलां, बहादुरपुर जट, गाडोवाली, किशनपुर, कटारपुर, फेरुपुर और रानी माजरा सहित कई गांवों के किसानों ने हिस्सा लिया। बैठक में सभी किसानों ने एकमत होकर कहा कि उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा और सरकार को परियोजना के लिए Alternative Route पर विचार करना चाहिए।

जिला महिला अस्पताल में बच्चों के इलाज की सुविधा फिर शुरू

इधर हरिद्वार जिला महिला अस्पताल से राहत भरी खबर भी सामने आई है। अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) डॉ. संतोष नेगी ने दोबारा ओपीडी शुरू कर दी है। पहले ही दिन करीब 45 बच्चों का उपचार किया गया। विशेषज्ञ डॉक्टर की वापसी से अभिभावकों को अब बच्चों के इलाज के लिए अन्य अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।