Will the UCC be implemented in all NDA-ruled states before 2029? Political uproar intensifies over Amit Shah's announcement.
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। अमित शाह ने कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित सभी राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी। उनके इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।
2029 से पहले NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने का दावा
अमित शाह के मुताबिक, 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA की सरकार वाले सभी राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। इस घोषणा के बाद समान नागरिक संहिता एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो गई है।
UCC का उद्देश्य अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और अन्य व्यक्तिगत मामलों से जुड़े अलग-अलग कानूनों की जगह एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। हालांकि, इसके दायरे और प्रावधानों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं।
विपक्ष ने भाजपा पर साधा निशाना
अमित शाह के बयान के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) ने UCC को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
पार्टी की ओर से कहा गया कि पूरे देश में UCC लागू करने का प्रस्ताव अगले आम चुनाव से पहले भाजपा के हिंदुत्व समर्थक आधार को मजबूत करने की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
विपक्ष ने भाजपा के समानता और एकरूपता से जुड़े तर्कों पर भी सवाल उठाए। उसका कहना है कि अलग-अलग समुदायों के लिए कानूनों को एक समान करना अपने आप में समानता सुनिश्चित नहीं करता।
‘एकरूपता का मतलब समानता नहीं’
विपक्ष ने तर्क दिया कि ‘एकरूपता का मतलब समानता नहीं है।’ विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और छात्रों तथा युवाओं से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान देने के बजाय ऐसे मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है, जिससे समाज में राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है।
हालांकि, भाजपा लंबे समय से UCC को समान नागरिक अधिकारों और कानून के स्तर पर समानता से जोड़कर देखती रही है। पार्टी का तर्क रहा है कि देश में नागरिकों के लिए व्यक्तिगत कानूनों की व्यवस्था समान होनी चाहिए।
उत्तराखंड में पहले से लागू है UCC
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता पहले ही लागू हो चुकी है। राज्य में 2025 में UCC लागू किया गया था। इसके साथ उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में UCC लागू करने वाला पहला राज्य बना।
अब यदि NDA शासित अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जाते हैं, तो UCC का दायरा काफी व्यापक हो सकता है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में इसे लागू करने की प्रक्रिया और कानूनी पहलू अलग हो सकते हैं।
2029 से पहले UCC बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
अमित शाह के ताजा बयान के बाद UCC एक बार फिर भाजपा और विपक्ष के बीच बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में सामने आया है। एक ओर भाजपा इसे समान नागरिक अधिकारों और कानून में एकरूपता से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी राजनीति से जोड़कर सरकार पर निशाना साध रहा है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि NDA शासित राज्य UCC को लागू करने के लिए किस तरह की प्रक्रिया अपनाते हैं और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले इसे लेकर केंद्र और राज्यों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।