From Statehood Restoration to the Prisoners Issue, NC submits a memorandum to the Home Minister.
Jammu and Kashmir political update से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (National Conference – NC) के नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों ने केंद्र सरकार के समक्ष जम्मू-कश्मीर से जुड़े प्रमुख मुद्दे उठाए हैं। सांसदों ने Union Home Minister Amit Shah से मुलाकात कर statehood restoration, बाहरी जेलों में बंद कैदियों की वापसी और Business Rules notification जैसी मांगों पर चर्चा की।
Statehood Restoration को बताया सबसे अहम मुद्दा
Chaudhary Mohammad Ramzan के नेतृत्व में तीन सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को नई दिल्ली में गृह मंत्री से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने एक औपचारिक memorandum सौंपते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि constitutional values, federalism और democratic dignity से जुड़ा मसला है।
सांसदों ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल होने में लगातार हो रही देरी से जनता में लोकतांत्रिक, प्रशासनिक और भावनात्मक असंतोष बढ़ रहा है, जिसे लोग constitutional dignity violation के रूप में देख रहे हैं।
PM Modi और Home Minister के वादों का दिलाया हवाला
चौधरी मोहम्मद रमजान ने अपने पत्र में कहा कि संसद में Prime Minister Narendra Modi और Home Minister Amit Shah द्वारा दिए गए आश्वासनों के अनुरूप केंद्र सरकार को clear, concrete और time-bound steps उठाने चाहिए। उनका कहना है कि इससे जम्मू-कश्मीर में भरोसा और सामान्य लोकतांत्रिक माहौल बहाल हो सकेगा।
Outside Jails में बंद कैदियों का मुद्दा भी उठाया
NC सांसदों ने जम्मू-कश्मीर के कैदियों को राज्य से बाहर की जेलों में रखे जाने की नीति की समीक्षा की मांग की। उन्होंने कहा कि कई मामलों में गंभीर आरोप साबित नहीं हो पाए हैं, इसके बावजूद कैदी वर्षों से जेल में हैं।
सांसदों का कहना है कि यह व्यवस्था economic hardship और humanitarian crisis को जन्म दे रही है। हजारों परिवार आर्थिक तंगी के कारण अपने परिजनों से मिलने नहीं जा पाते। कई मांएं आखिरी बार अपने बेटों को देखने की इच्छा लिए जीवन गुजार रही हैं, जबकि कई बच्चे अपने पिता को केवल तस्वीरों में ही जानते हैं।
‘गरीबी की सजा’ भुगत रहे परिवार: NC
NC नेताओं ने इस व्यवस्था को “punishment of poverty” करार देते हुए कहा कि कश्मीरी न तो जन्मजात अपराधी हैं और न ही कोई खतरा, बल्कि वे भी Indian citizens हैं, जिन्हें सम्मान, न्याय और मानवीय व्यवहार का अधिकार है।
उनका कहना है कि कैदियों को घर से दूर रखना सिर्फ कैदियों को नहीं, बल्कि निर्दोष परिवारों को भी मानसिक और सामाजिक पीड़ा देता है।
Business Rules Notification की भी मांग
प्रतिनिधिमंडल ने Business Rules Jammu and Kashmir को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चुनी हुई सरकार और Raj Bhavan के बीच अधिकारों का स्पष्ट बंटवारा जरूरी है। इसके लिए Business Rules को जल्द से जल्द नोटिफाई किया जाना चाहिए, ताकि transparent governance और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं सुचारु रूप से चल सकें।