Pakistani gangster building a gang in India via a gaming app! 3 minors reveal shocking details.
ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म अब केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गए हैं। दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान का कुख्यात गैंगस्टर शहजाद भट्टी (Shahzad Bhatti) कथित तौर पर गेमिंग ऐप्स और सोशल मीडिया के जरिए भारत में युवाओं और नाबालिगों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा पकड़े गए तीन नाबालिगों से पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन किशोरों का संपर्क पहले ऑनलाइन गेमिंग के दौरान कुछ लोगों से हुआ और बाद में उन्हें कथित तौर पर गैंगस्टर नेटवर्क से जोड़ा गया।
Online Gaming बना संपर्क का माध्यम
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूरा नेटवर्क एक सुनियोजित तरीके से काम करता है। शुरुआत ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर दोस्ती से होती है। इसके बाद बातचीत सोशल मीडिया अकाउंट्स तक पहुंचती है और फिर संपर्क बनाए रखने के लिए Encrypted Messaging Apps का इस्तेमाल किया जाता है।
जांच में यह भी सामने आया कि युवाओं को पहले छोटे-छोटे टास्क दिए जाते हैं। धीरे-धीरे उनका भरोसा जीतकर उन्हें कथित तौर पर बड़ी आपराधिक गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश की जाती है।
पंजाब से शुरू हुआ कनेक्शन, दिल्ली-NCR तक पहुंचा नेटवर्क
पुलिस जांच के अनुसार, गाजियाबाद का एक नाबालिग ऑनलाइन गेम खेलते समय पंजाब के एक युवक के संपर्क में आया। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और बाद में उस युवक ने कथित तौर पर उसे पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर शहजाद भट्टी से जोड़ दिया।
इसके बाद नाबालिग ने अपने दो अन्य साथियों को भी इस नेटवर्क से परिचित कराया। जांच एजेंसियों का दावा है कि सोशल मीडिया और विशेष मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगातार संपर्क बनाए रखा गया।
सोशल मीडिया पोस्ट ने खोला राज
दिल्ली पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान यह भी पता चला कि एक नाबालिग ने कथित तौर पर हथियार के साथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी थी। यही पोस्ट पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सुराग साबित हुई।
डिजिटल ट्रैकिंग और तकनीकी विश्लेषण के जरिए पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही। इसके बाद कई हथियार भी बरामद किए गए, जिनकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे नेटवर्क का पता लगाना आसान नहीं होता क्योंकि:
फर्जी नाम और नकली प्रोफाइल का इस्तेमाल किया जाता है।
नेटवर्क कई राज्यों और देशों में फैला होता है।
अधिकांश सदस्य कभी आमने-सामने नहीं मिलते।
बातचीत पूरी तरह डिजिटल माध्यमों से होती है।
एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के कारण निगरानी मुश्किल हो जाती है।
डिजिटल फुटप्रिंट से खुलती हैं परतें
हालांकि, जांच एजेंसियां सोशल मीडिया गतिविधियों, मोबाइल डेटा, इंटरनेट रिकॉर्ड और डिजिटल फुटप्रिंट की मदद से ऐसे नेटवर्क की पहचान करती हैं। इसके अलावा बरामद हथियारों और अन्य सामग्रियों की फोरेंसिक जांच भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
युवाओं को सतर्क रहने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय युवाओं और अभिभावकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। अनजान लोगों से व्यक्तिगत जानकारी साझा करना, संदिग्ध लिंक पर क्लिक करना या किसी के कहने पर कोई गतिविधि करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
Shahzad Bhatti Network से जुड़े इस कथित मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किस तरह युवाओं तक पहुंचने के लिए किया जा सकता है। फिलहाल दिल्ली पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं तथा यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इसके तार भारत के किन-किन हिस्सों तक फैले हुए हैं।