Politics heats up ahead of the 2027 Assembly elections, with both the organization and the government active.
उत्तर प्रदेश भाजपा में हाल के समय में असहजता की स्थिति बनी हुई है। यह असहजता कोई बाहरी दबाव नहीं, बल्कि पार्टी के अपने नेताओं के भीतर टकराव और खेमेबंदी की वजह से है। यह स्थिति पूरब से पश्चिम तक फैलती नजर आ रही है।
पश्चिम से पूरब तक बढ़ती खिंचतान
पार्टी के भीतर पाले खिंचे हैं और मोर्चेबंदी गहराई है। मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, आगरा, और कानपुर देहात में सांसद और विधायकों के बीच विवाद खुले में देखे गए। देवरिया और गोंडा में भी हालात गरम रहे। इन विवादों की वजह से पार्टी असहज महसूस कर रही है और विपक्ष इसका लाभ उठा रहा है।
प्रमुख विवाद और टकराव
मुजफ्फरनगर में केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और संगीत सोम के बीच विवाद खुले में आया।
अलीगढ़ में सांसद सतीश गौतम और पूर्व मंत्री जयवीर सिंह के बीच पाले खिंच गए।
आगरा की सीकरी लोकसभा सीट पर सांसद और विधायक के बीच खुला टकराव देखा गया।
मथुरा में कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने रालोद के साथ सवाल उठाए, जिससे पार्टी नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ा।
कानपुर देहात से मिश्रिक तक भी विवाद सामने आया। राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला के पति अनिल शुक्ल वारसी और अकबरपुर के सांसद देवेंद्र सिंह उर्फ भोले सिंह के बीच तनातनी हुई।
गोंडा से देवरिया तक
पूर्व सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह के तेवर भी पार्टी के लिए असहज हैं। उन्होंने कई मौकों पर सपा की तारीफ की या अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए। देवरिया में हाल ही में एक राज्यमंत्री के खिलाफ पार्टी के स्थानीय नेता विरोध में खड़े हुए और धरना-प्रदर्शन भी हुए।
पार्टी नेतृत्व की स्थिति
इन विवादों पर यूपी भाजपा नेतृत्व ने अभी तक कोई स्पष्ट कदम नहीं उठाया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि “अनुशासनहीनता के मामले बढ़ रहे हैं, अब नेतृत्व को कड़े कदम उठाने होंगे।”