Nanakmatta Gurudwara Murder Case: Baba Anoop Singh gets bail, court makes important statement
उत्तराखंड में नगर निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों से पहले मतदाता सूची को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला अब उत्तराखंड हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। समाजसेवी शक्ति सिंह बर्त्वाल द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में सुनवाई हो सकती है।
मतदाता सूची में विसंगति, नामांकन पर असर
राज्य के कई इलाकों में नगर निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत की मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति का नाम शामिल होने के बावजूद रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा अलग-अलग फैसले दिए गए हैं। कहीं किसी का नामांकन रद्द कर दिया गया तो कहीं स्वीकृत कर लिया गया। इससे मतदाताओं और उम्मीदवारों में भ्रम की स्थिति बन गई है।
याचिका में क्या कहा गया?
याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता शक्ति सिंह बर्त्वाल ने इस विषय पर 7 और 8 जुलाई 2025 को उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई थी। पत्र में आग्रह किया गया था कि ऐसे मतदाताओं को, जो दोनों सूची में शामिल हैं, चुनाव में भाग लेने से वंचित न किया जाए और इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
चूंकि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गए जवाब से याचिकाकर्ता संतुष्ट नहीं हुए, इसलिए उन्होंने अब इस मुद्दे को न्यायालय में उठाया है।
क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे लोकतांत्रिक अधिकार, नामांकन की वैधता, और मतदाता सूची की पारदर्शिता से जुड़ा है। यदि समय रहते इस पर स्पष्ट आदेश नहीं आया तो आगामी निकाय और पंचायत चुनावों में कई विवाद और कानूनी उलझनें उत्पन्न हो सकती हैं।
संभावित असर:
राज्य निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची के मापदंडों पर पुनः विचार करना पड़ सकता है।
उम्मीदवारों के नामांकन की वैधता पर न्यायिक आदेश आए तो कई सीटों पर मुकाबला बदल सकता है।