चीन ने भारतीय व्यापारियों को दिया बड़ा सरप्राइज, तिब्बत में पहली बार पक्की दुकानें

Taklakot Trade News: चीन ने भारतीय व्यापारियों को चौंकाते हुए तिब्बत के तकलाकोट (Taklakot) में व्यापार के लिए नई सुविधा उपलब्ध कराई है। पहली बार ऐसा होने जा रहा है कि भारतीय व्यापारी वहां permanent shops यानी पक्की दुकानों से कारोबार कर सकेंगे। अब तक सीमा पार व्यापार अस्थायी इंतजामों के सहारे चलता था, लेकिन इस नई व्यवस्था को India-China border trade के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

सीमावर्ती इलाकों के कारोबारियों के लिए यह खबर खास मायने रखती है। लंबे समय से व्यापारी बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यवस्थित बाजार की मांग कर रहे थे। अब चीन की ओर से भारतीय व्यापारियों के लिए अलग-अलग पक्की दुकानों का निर्माण कराया गया है, जिससे cross-border trade को नई गति मिलने की उम्मीद है।

पिथौरागढ़ जिला प्रशासन के अनुसार, यदि सभी तैयारियां समय पर पूरी हो जाती हैं तो भारतीय व्यापारियों को ये दुकानें जून से allot की जा सकती हैं। यह बॉर्डर पॉइंट पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से करीब 300 किलोमीटर दूर स्थित है और कई वर्षों से पारंपरिक व्यापार का अहम केंद्र रहा है। अब यहां सुविधाओं के उन्नयन से स्थानीय व्यापारियों में नया उत्साह देखा जा रहा है।

India-China Trade Committee के महासचिव दौलत रायपा के मुताबिक, वर्ष 2019 तक जब सीमा व्यापार सामान्य रूप से चल रहा था, तब भारतीय व्यापारियों के पास पक्की दुकानें नहीं थीं। वे अस्थायी दुकानों या सीमित साधनों के साथ नेपाली व्यापारियों के सहयोग से कारोबार करते थे। अब पहली बार व्यवस्थित तरीके से अलग-अलग स्थायी दुकानें उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिसे व्यापारी एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं।

जिला प्रशासन ने भी इस संभावित व्यापारिक गतिविधि को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने संबंधित विभागों को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। BSNL को सीमा क्षेत्र में network connectivity और संचार व्यवस्था मजबूत करने के लिए कहा गया है। वहीं गुंजी क्षेत्र में शौचालय, पर्यटन सुविधाएं और जरूरी बुनियादी ढांचे के विकास पर भी काम किया जा रहा है, ताकि व्यापार के साथ-साथ यात्रियों और स्थानीय लोगों को भी सुविधा मिल सके।

Taklakot का रणनीतिक और व्यापारिक महत्व काफी बड़ा है। Lipulekh Pass के पास स्थित यह क्षेत्र लंबे समय से भारत-तिब्बत सीमा व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां ऊनी कपड़े, नमक, घी और अन्य पारंपरिक सामानों का आदान-प्रदान होता रहा है। ऐसे में अगर व्यापार दोबारा सुचारू रूप से शुरू होता है, तो इसका फायदा केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और सीमा क्षेत्र के कारोबार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

कोरोना काल के बाद से Taklakot border trade ठप पड़ा हुआ था। आखिरी बार वर्ष 2019 में भारत और चीन के व्यापारियों के बीच यहां नियमित कारोबार हुआ था। लगभग छह साल के लंबे अंतराल के बाद अब दोबारा व्यापार शुरू होने की संभावना ने सीमावर्ती क्षेत्रों में नई उम्मीद जगा दी है। स्थानीय व्यापारी मानते हैं कि यह पहल border economy को revive करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

हालांकि, व्यापार की औपचारिक शुरुआत और दुकान आवंटन की अंतिम प्रक्रिया प्रशासनिक और द्विपक्षीय समन्वय पर निर्भर करेगी। इसके बावजूद, पक्की दुकानों की तैयारी ने यह साफ संकेत दे दिया है कि Tibet trade route को फिर से सक्रिय करने की दिशा में गंभीर प्रयास हो रहे हैं।