Chidambaram said- I am not sure that the India alliance is still intact, there is a stir in politics
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की विपक्षी दल अकसर आलोचना करते रहे हैं, लेकिन हाल के दिनों में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर और अब पी. चिदंबरम का बदलता हुआ रुख राजनीतिक विश्लेषकों के लिए बड़ा संकेत बन गया है। पहले थरूर ने केंद्र सरकार के अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक कदमों की सराहना की और अब पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने भी न केवल भारत-पाकिस्तान सीजफायर और ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार की प्रशंसा की, बल्कि INDIA गठबंधन की स्थिरता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चिदंबरम ने क्यों कहा- मुझे यकीन नहीं कि INDIA गठबंधन कायम है
दिल्ली के India International Centre में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए चिदंबरम ने कहा,
“INDIA गठबंधन के अस्तित्व को लेकर मुझे पूरी तरह भरोसा नहीं है। अगर गठबंधन अब भी बरकरार है तो यह खुशी की बात होगी, लेकिन यह बहुत मज़बूत नहीं लगता।”
उन्होंने कहा कि गठबंधन केवल चुनाव के समय नहीं बनाए जाते, बल्कि उन्हें पूरे कार्यकाल में पोषित करना होता है। अपने गृह राज्य तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा,
“केवल केरल और तमिलनाडु ऐसे राज्य हैं जहां गठबंधन जीत-हार दोनों में एकजुट रहते हैं। बाकी राज्यों में यह फार्मूला विफल रहा है।”
मोदी सरकार की नीतियों पर चिदंबरम की सहमति क्यों है अहम
चिदंबरम ने अपने हालिया लेख में सीमा सुरक्षा, ऑपरेशन सिंदूर, और भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर समझौते को प्रभावी कदम बताया। ये बयान ऐसे वक्त पर आया है जब पूरा विपक्ष लोकसभा चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए रणनीति बनाने में जुटा है।
उनका यह रुख कांग्रेस के आंतरिक मतभेदों को भी उजागर करता है। वहीं थरूर की मोदी सरकार की विदेश नीति की तारीफ, और अब चिदंबरम का यह बयान, Congress High Command के लिए एक नई चुनौती बनते जा रहे हैं।
क्या INDIA गठबंधन की एकता खतरे में है?
चिदंबरम के बयान के बाद कांग्रेस के भीतर और बाहर यह चर्चा तेज हो गई है कि INDIA गठबंधन की रणनीति और मजबूती पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है। उनके अनुसार,
“अगर आप किसी दल के साथ गठबंधन करना चाहते हैं, तो उसे बार-बार अपमानित या दबाव में नहीं डाल सकते।”
पुस्तक के सह-लेखक और वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने भी कहा कि गठबंधन को टिकाए रखना सभी दलों की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।
विपक्ष में अंदरूनी मतभेद या नई राजनीतिक रणनीति?
पी. चिदंबरम और शशि थरूर जैसे दिग्गज नेताओं के बदले सुर यह संकेत देते हैं कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन को अपनी आंतरिक स्थिरता और दिशा पर गंभीरता से विचार करना होगा। साथ ही यह भी तय है कि अगर विपक्षी एकता में दरार पड़ती है, तो 2024 का चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।