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उत्तराखंड के Kedarnath Dham के कपाट आज शीतकाल के लिए विधिवत रूप से बंद कर दिए गए। “जय बाबा केदारनाथ” के जयकारों से पूरी घाटी गूंज उठी। भगवान शिव की चल विग्रह डोली अब शीतकालीन गद्दीस्थल Omkareshwar Temple, Ukhimath के लिए रवाना हो गई है।
कपाटबंदी के इस पवित्र अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami स्वयं केदारनाथ धाम पहुंचे और बाबा केदार के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
Kedarnath से ऊखीमठ तक डोली यात्रा का पूरा शेड्यूल
बाबा केदारनाथ की पंचमुखी डोली आज सुबह धाम से रवाना होकर पहले पड़ाव Rampur में रात्रि विश्राम करेगी।
24 अक्टूबर: डोली Guptkashi पहुंचेगी।
25 अक्टूबर: भगवान केदारनाथ की डोली Omkareshwar Temple (Ukhimath) पहुंचेगी, जहां अगले छह महीनों तक शीतकालीन पूजा-अर्चना की जाएगी।
श्रद्धालु अब Winter Kedarnath Yatra के दौरान ऊखीमठ पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे।
Kedarnath Dham में उमड़ा भक्तों का सैलाब
कपाट बंद होने से पहले Kedarnath Dham में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। हर कोई बाबा केदार के दर्शन कर खुद को धन्य करने के लिए पहुंचा था। सुबह 4 बजे तक आम भक्तों ने दर्शन किए। इसके बाद विधि-विधान से समाधि पूजा की गई, जिसमें Shivling को भस्म, अनाज, फूल और रुद्राक्ष से सजाया गया।
सुबह 8:30 बजे पारंपरिक विधि से मंदिर का मुख्य द्वार (Eastern Gate) बंद कर दिया गया। इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं ने Kedarnath के दर्शन किए — कुल 17,45,065 भक्तों ने बाबा के दर्शन किए।
Yamunotri Dham में भी जारी धार्मिक अनुष्ठान
Kedarnath के साथ-साथ Yamunotri Dham में भी कपाटबंदी की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। भैया दूज के अवसर पर दोपहर 12:30 बजे यमुनोत्री मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे।
शीतकाल के दौरान Maa Yamuna अपने मायके Kharsali Village में विराजेंगी, जहां श्रद्धालु छह महीनों तक दर्शन और पूजा कर सकेंगे। इस बीच Shani Dev की डोली अपनी बहन यमुना माता को लेने के लिए यमुनोत्री धाम रवाना हो चुकी है।
Char Dham Yatra 2025 का समापन, अब शुरू होगी Winter Yatra
चारधाम यात्रा के इस वर्ष के पड़ाव के समाप्त होने के साथ अब शीतकालीन यात्रा यानी Winter Char Dham Yatra का आरंभ होगा। इसमें श्रद्धालु ऊखीमठ, खरसाली, जोशीमठ और मुखबा जैसे शीतकालीन स्थलों पर देव दर्शन कर सकते हैं।
इस बार चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड तोड़ यात्रियों ने भाग लिया, जिससे उत्तराखंड की धार्मिक पर्यटन अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।