West Bengal Re-Polling: Voting resumes at 15 booths; find out why the decision was made to re-poll.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आज घोषित होने वाले हैं। 243 सीटों पर दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को वोटिंग हुई थी। सुबह 8 बजे से राज्य भर के 38 जिलों में बने 46 मतगणना केंद्रों पर काउंटिंग शुरू होगी। चुनावी नतीजों से पहले पूरे देश में यह उत्सुकता बढ़ी हुई है कि अगली सरकार NDA बनाएगी या महागठबंधन (MGB)।
इसी बीच चर्चा उन छह विधानसभा सीटों की हो रही है, जिनका पिछले कई दशकों से government formation indicator के रूप में अहम रोल रहा है। इन सीटों पर जिस पार्टी की जीत होती रही है, प्रायः पटना में उसी पार्टी की सरकार बनी है।
आइए जानते हैं कौन-सी हैं ये 6 Kingmaker Seats और क्या रहा है इनका ऐतिहासिक पैटर्न।
1. केवटी (मधुबनी) – 100% Track Record वाली “Government Predictor Seat”
केवटी विधानसभा क्षेत्र सबसे चर्चित और विश्वसनीय संकेतक सीट मानी जाती है।
1977 से 2020 तक इस सीट का रिकॉर्ड 100% सटीक रहा है।
यानी जिसने केवटी जीती, वही पार्टी राज्य में सत्ता में आई।
इतिहास:
1977: जनता पार्टी जीती – सरकार भी जनता पार्टी की
1980, 1985: कांग्रेस जीती – राज्य में कांग्रेस की सरकार
1990–2000: जनता दल/राजद जीते – लालू-राबड़ी सरकार
2005, 2010: भाजपा जीती – नीतीश की NDA सरकार
2015: राजद जीती – महागठबंधन की सरकार
2020: भाजपा जीती – NDA सत्ता में
वर्तमान स्थिति:
सीट पर भाजपा के मुरारी मोहन झा विधायक
इस बार उनका मुकाबला RJD उम्मीदवार फराज फातमी से है।
2. सहरसा – सत्ता की दिशा दिखाने वाली पुरानी निर्णायक सीट
सहरसा भी केवटी की तरह एक Strong Political Indicator Seat है।
पैटर्न:
1977: जनता पार्टी जीत – जनता पार्टी की सरकार
1980, 1985: कांग्रेस जीत – कांग्रेस की सरकार
1990–2000: जनता दल/राजद जीत – राज्य में RJD शासन
2005, 2010: भाजपा जीत – NDA सत्ता में
2015: राजद जीत – महागठबंधन सत्ता में
2020: भाजपा जीत – NDA सत्ता में
वर्तमान विधायक:
भाजपा के आलोक रंजन झा
उनके सामने MGB की ओर से IIP के इंद्रजीत गुप्ता
3. सकरा (मुजफ्फरपुर) – सिर्फ एक बार टूटा है पैटर्न
सकरा सीट 1977 से अब तक सरकार बनाने वाले पैटर्न पर लगभग हमेशा खरी उतरी है।
एकमात्र अपवाद:
1985: शिवनंदन पासवान (लोकदल) जीते
लेकिन सरकार बनी कांग्रेस की
बाकी सभी चुनाव:
जिसने यहां जीत हासिल की, उसकी पार्टी ने बिहार में सरकार बनाई।
वर्तमान में यह सीट JDU के पास है।
4. मुंगेर – लगभग हमेशा सत्ता का संकेत, सिर्फ एक बार उलटफेर
मुंगेर सीट पर भी वोटिंग का पैटर्न सरकार के साथ चलता रहा है।
अपवाद:
1985: लोकदल जीता
सरकार कांग्रेस की बनी
वर्तमान विधायक:
भाजपा के प्रणय कुमार यादव
5. पिपरा (पूर्वी चंपारण) – 2015 में टूटा था सिलसिला
पिपरा भी उन सीटों में है जहां आमतौर पर चुनाव परिणाम सरकार की दिशा बताते हैं।
एकमात्र अपवाद:
2015: भाजपा के श्यामबाबू यादव जीते
जबकि राज्य में नीतीश के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार बनी
वर्तमान विधायक:
श्यामबाबू यादव (भाजपा)
इस बार उनका मुकाबला CPI(M) के राजमंगल प्रसाद से
6. बरबीघा (शेखपुरा) – अधिकतर समय सरकार बनाने वाली पार्टी के साथ
बरबीघा सीट पर भी लगभग हमेशा वही पार्टी जीतती रही है, जो राज्य की सरकार बनाती है।
रिकॉर्ड:
1977: जनता पार्टी जीती
1980–2000: कांग्रेस का दबदबा रहा
2000 में कांग्रेस महागठबंधन (RJD) की सहयोगी बन गई
2015: कांग्रेस जीती और MGB सरकार में शामिल रही
2020: कांग्रेस के सुदर्शन कुमार JDU टिकट पर जीत गए
यानी सीट ने सत्ता का रुख लगभग सही पहचाना।
क्यों कहलाती हैं ये 6 सीटें बिहार की ‘Government Maker Seats’?
इन छह सीटों का historical data pattern साफ बताता है कि:
इन क्षेत्रों का राजनीतिक रुझान अक्सर statewide mood को reflect करता है।
कई बार ये सीटें चुनावों का early trend indicator साबित होती हैं।
Analyst और parties इन सीटों पर विशेष फोकस इसलिए करती हैं क्योंकि इन सीटों के वोटर्स ने दशकों से शायद ही कभी गलत अनुमान लगाया हो।
आज के नतीजे यह बताएंगे कि क्या 2025 में भी इन सीटों का जादू कायम रहेगा या इतिहास में पहली बार बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।